
देश की राजनीति और कानूनी गलियारों से इस वक्त की बेहद सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज एक बेहद संवेदनशील मामले में केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी साई भगीरथ को किसी भी तरह की फौरी राहत देने से साफ मना कर दिया है। भगीरथ पर एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न का बेहद गंभीर आरोप है। कोर्ट ने आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की अंतरिम मांग को पूरी तरह खारिज करते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर अदालत 21 मई 2026 को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
जब कोर्ट में आधी रात तक चलती रही तीखी बहस
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच की जस्टिस टी. माधवी देवी ने आधी रात तक वकीलों की दलीलें सुनीं। भगीरथ की तरफ से देश के दिग्गज और वरिष्ठ वकील एस. निरंजन रेड्डी ने पैरवी की। उन्होंने अदालत से बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि जब तक अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक के लिए उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए और उसे सुरक्षा प्रदान की जाए। लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए कड़ा रुख अपनाया और दोटूक कह दिया कि इस मोड़ पर आरोपी को किसी भी तरह का अंतरिम संरक्षण या निर्देश नहीं दिया जा सकता।
‘रिलेशनशिप’ और ‘राजनीतिक साजिश’ का दिया गया हवाला
अदालत के भीतर बचाव पक्ष के वकील ने अपने मुवक्किल को बचाने के लिए कई तरह के तर्क पेश किए और पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की। आरोपी के वकील ने दावा किया कि याचिकाकर्ता भगीरथ और पीड़ित लड़की पहले से एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में थे और इस बात की पूरी जानकारी लड़की के माता-पिता को भी थी। बचाव पक्ष ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि यह कथित घटना पिछले साल की है और इसमें काफी लंबे समय के बाद कानूनी सलाह लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई है, जो इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
संगीन धाराओं को जोड़ने पर वकील ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने पुलिसिया कार्रवाई पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि जब शुरुआत में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी, तब उसमें केवल जमानती धाराएं ही शामिल थीं। लेकिन बाद में एक सोची-समझी रणनीति और ‘दुर्भावनापूर्ण इरादे’ के तहत मामले को गंभीर बनाने के लिए इसमें ‘पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ जैसी गैर-जमानती और सख्त धाराएं जोड़ दी गईं। वकील ने दलील दी कि चूंकि तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी और केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बीच पुराना राजनीतिक द्वेष है, इसलिए उनके बेटे को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से राज्य सरकार के हाथ में है, तो ऐसे में केंद्रीय मंत्री भला जांच को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल, कोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद राहत देने से इनकार करते हुए फैसले की तारीख मुकर्रर कर दी है।
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