Rahul Gandhi : सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में एक नया मोड़ आया है। सत्र न्यायालय ने वॉयस सैंपल (आवाज का नमूना) तलब किए जाने की मांग वाली याचिका पर राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 8 मई 2018 का है, जब कर्नाटक के बेंगलुरु में एक जनसभा के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुलतानपुर की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
निचली अदालत के आदेश को चुनौती
इससे पहले, सुलतानपुर की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने 2 मई 2026 को राहुल गांधी का वॉयस सैंपल लेने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया था। इस आदेश से असंतुष्ट होकर वादी पक्ष के वकील संतोष पाण्डेय ने सत्र न्यायालय (सत्र न्यायाधीश) में निगरानी याचिका (रिवीजन) दाखिल की।
सत्र न्यायाधीश राकेश ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। सेशन कोर्ट में इस मामले के लंबित होने के कारण, निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने फिलहाल मुकदमे की सुनवाई को 17 जून तक के लिए स्थगित कर दिया है।
अब तक का घटनाक्रम
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सरेंडर और जमानत: राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को एमपी-एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी।
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बयान दर्ज: 26 जुलाई 2024 को कोर्ट में उपस्थित होकर राहुल गांधी ने अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था।
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वॉयस सैंपल का विवाद: राहुल गांधी ने मुकदमे में इस्तेमाल कथित ऑडियो क्लिप को गलत और भ्रामक बताया था। इसके बाद वादी पक्ष ने सत्यता की जांच के लिए राहुल गांधी के वॉयस सैंपल की मांग की थी।
अब सत्र न्यायालय के नोटिस के बाद, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राहुल गांधी की ओर से इस पर क्या जवाब दाखिल किया जाता है।
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