नई दिल्ली। देश की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद अहम और हंगामेदार होने वाला है। लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाए गए संकल्प प्रस्ताव (Resolution) पर सदन में चर्चा और विचार किया जाएगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच छिड़ी इस सियासी जंग ने संसद का पारा सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने-अपने सांसदों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी कर दिया है, जिसमें सोमवार को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।
विपक्ष का दांव: स्पीकर के खिलाफ मोर्चाबंदी
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही इस नोटिस पर विचार किया जा सकता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता की कमी रही है, जिसके चलते वे ओम बिरला को हटाने की मांग पर अड़े हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष इस प्रस्ताव के जरिए सरकार को घेरने और सदन में अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
भाजपा की जवाबी रणनीति: व्हिप के जरिए किलेबंदी
विपक्ष के इस हमले का जवाब देने के लिए सत्ताधारी भाजपा ने भी पूरी तैयारी कर ली है। भाजपा ने अपने सांसदों को जारी व्हिप में कहा है कि वे सोमवार को सुबह से ही सदन में मौजूद रहें और पार्टी के रुख का समर्थन करें। सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री का कहना है कि यह प्रस्ताव पूरी तरह से आधारहीन है और केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश है। संख्या बल की बात करें तो सत्ता पक्ष फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, लेकिन सदन के भीतर होने वाली बहस बेहद तीखी रहने की उम्मीद है।
क्या कहता है संविधान का नियम?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया का प्रावधान है। इसके लिए 14 दिन का अग्रिम नोटिस देना अनिवार्य होता है, जिसकी समय सीमा अब पूरी हो रही है। यदि सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से यह संकल्प पारित हो जाता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ता है। हालांकि, मौजूदा अंकगणित को देखते हुए विपक्ष के लिए इस प्रस्ताव को पारित कराना एक बड़ी चुनौती है। सोमवार को होने वाली इस प्रक्रिया पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर संसद की गरिमा और कार्यप्रणाली से जुड़ा मामला है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया