वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी तनाव और सैन्य अभियानों के बीच अमेरिका में एक नया राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिरता (Mental Stability) को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब अमेरिका के रक्षा सचिव (Secretary of Defense) पीट हेगसेठ से इस बारे में सीधा सवाल पूछा गया। हेगसेठ ने न केवल ट्रंप का बचाव किया, बल्कि सवाल पूछने वालों पर ही पलटवार कर दिया।
किसने उठाया सवाल और क्या थी वजह?
डेमोक्रेट सांसद सारा जैकब्स ने रक्षा सचिव पीट हेगसेठ से पूछा कि क्या डोनाल्ड ट्रंप मानसिक रूप से इतने फिट हैं कि वे राष्ट्रपति और ‘कमांडर इन चीफ’ के पद पर बने रहें?
सवाल उठने के पीछे मुख्य कारण:
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सोशल मीडिया पोस्ट: ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा था कि यदि शर्तें नहीं मानी गईं, तो “आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी।”
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उत्तेजक भाषा: ट्रंप अक्सर आधी रात को ऐसे पोस्ट करते हैं जिनमें विनाश और युद्ध की धमकियां होती हैं, जिससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
पीट हेगसेठ का जवाब: “अविश्वसनीय कमांडर इन चीफ”
सांसद सारा जैकब्स के सवाल पर पीट हेगसेठ भड़क गए। उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का जिक्र छेड़ दिया।
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बाइडेन पर तंज: हेगसेठ ने पूछा, “क्या इस तरह के सवाल कभी ट्रंप के पूर्ववर्ती जो बाइडेन से भी पूछे गए थे?”
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ट्रंप का बचाव: जब जैकब्स ने याद दिलाया कि अभी बाइडेन नहीं बल्कि ट्रंप राष्ट्रपति हैं, तो हेगसेठ ने कहा, “मैं कमांडर इन चीफ के बारे में इस तरह की अपमानजनक चर्चा में नहीं पड़ना चाहता। डोनाल्ड ट्रंप एक अविश्वसनीय नेता हैं जो अपनी सेना को हमेशा सबसे आगे रखते हैं।”
संवैधानिक संकट: क्या खत्म हो गई 60 दिनों की समय सीमा?
ट्रंप की मानसिक स्थिति के साथ-साथ अब एक कानूनी पेंच भी फंस गया है। अमेरिका में 1973 का ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ (War Powers Resolution) लागू है।
क्या है यह कानून?
यदि राष्ट्रपति कहीं सैन्य कार्रवाई शुरू करते हैं, तो उन्हें 60 दिनों के भीतर संसद (कांग्रेस) से मंजूरी लेनी होती है। यदि मंजूरी नहीं मिलती, तो सेना वापस बुलानी पड़ती है।
ताजा विवाद:
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ट्रंप ने 2 मार्च को इस अभियान की जानकारी दी थी, जिसकी समय सीमा 1 मई 2026 को पूरी हो रही है।
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विपक्ष का कहना है कि अब ट्रंप को संसद से अनुमति लेनी चाहिए।
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वहीं, हाउस स्पीकर माइक जॉनसन का तर्क है कि फिलहाल कोई ‘सक्रिय युद्ध’ (Active Combat) नहीं चल रहा है, केवल शांति वार्ता की कोशिश हो रही है, इसलिए अलग से मंजूरी की जरूरत नहीं है।
ईरान-अमेरिका तनाव का बैकग्राउंड
इस पूरे विवाद की जड़ 28 फरवरी को हुई वह कार्रवाई है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल के जहाजों का रास्ता रोक दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। खुद ट्रंप ने इस कार्रवाई को कभी ‘युद्ध’ तो कभी ‘छोटी सैर’ (Little Excursion) बताकर भ्रम की स्थिति पैदा की है।
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