लंदन: ब्रिटेन में भारतीय मूल के मकान मालिकों द्वारा किराये की संपत्तियों के विज्ञापनों में धर्म के आधार पर खुलेआम भेदभाव करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। ‘द टेलीग्राफ’ अखबार की एक खोजी रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि फेसबुक और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कई अवैध विज्ञापन चल रहे हैं, जिनमें किरायेदार के धर्म और क्षेत्र को लेकर विशेष शर्तें रखी गई हैं।
सीक्रेट ऑपरेशन में क्या आया सामने?
टेलीग्राफ के रिपोर्टर ने एक गुप्त ऑपरेशन (Secret Operation) के दौरान उन मकान मालिकों और प्रॉपर्टी डीलर्स से संपर्क किया जिन्होंने ‘केवल मुस्लिम’ या ‘केवल हिंदू’ की शर्त रखी थी।
-
सीधा इनकार: जब रिपोर्टर ने एक मकान मालिक से 450 पाउंड के कमरे के लिए संपर्क किया, तो उसने गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों को कमरा देने से साफ इनकार कर दिया और फोन काट दिया।
-
सोशल मीडिया का जाल: फेसबुक, गमट्री और टेलीग्राम पर ‘मुस्लिम लड़के को प्राथमिकता’ या ‘केवल हिंदुओं के लिए’ जैसे विज्ञापन धड़ल्ले से पोस्ट किए जा रहे हैं। कुछ विज्ञापनों में तो विशेष रूप से ‘गुजराती’ या ‘पंजाबी’ बोलने वालों की ही मांग की गई थी।
कौन सी कंपनियां हैं रडार पर?
जांच में ‘रोशन प्रॉपर्टीज’ नामक कंपनी का नाम प्रमुखता से आया है, जिसने टिकटॉक पर ऐसे कई भेदभावपूर्ण विज्ञापन डाले थे। मामला तूल पकड़ते ही कंपनी ने अपना फेसबुक पेज हटा लिया है। हालांकि, गमट्री (Gumtree) के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि उनकी नीति गैरकानूनी भेदभाव को पूरी तरह प्रतिबंधित करती है और वे ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करते हैं।
क्या कहता है ब्रिटेन का ‘समानता अधिनियम 2010’?
ब्रिटेन का कानून आवास के मामले में धर्म, नस्ल या मूल स्थान के आधार पर भेदभाव को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
-
सख्त नियम: मकान मालिक पूरी संपत्ति किराये पर देते समय किसी विशेष धर्म को प्राथमिकता नहीं दे सकते।
-
एकमात्र अपवाद: यदि मकान मालिक खुद उसी घर में रह रहा है और रसोई या बाथरूम साझा किया जा रहा है, तो वह ‘शाकाहारी’ जैसी खान-पान की शर्तें रख सकता है, लेकिन धर्म के आधार पर वहां भी भेदभाव करना गैरकानूनी है।
‘ब्रिटेन-विरोधी’ है यह व्यवहार: रॉबर्ट जेनरिक
रिफॉर्म यूके के आर्थिक प्रवक्ता रॉबर्ट जेनरिक ने इन विज्ञापनों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें ‘घृणित और ब्रिटेन-विरोधी’ बताया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में नस्लवाद और धार्मिक भेदभाव के किसी भी रूप के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि अन्य समुदायों के साथ ऐसा होता, तो देश भर में भारी आक्रोश फैल जाता।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया