Apara Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में उत्तम माना गया है, और जब बात अपरा एकादशी की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ‘अपरा’ का अर्थ है अपार, यानी वह व्रत जो अपार पुण्य और सौभाग्य प्रदान करे। साल 2026 में यह पावन व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी के दिन किए गए दान का फल अनंत होता है। विशेष रूप से ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी के समय आने वाली इस एकादशी पर दान करने से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि भगवान विष्णु की कृपा से घर में धन-धान्य के भंडार भी भर जाते हैं।
अपरा एकादशी 2026: दान के लिए सबसे सटीक शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 13 मई को दान-पुण्य करने के लिए तीन विशेष मुहूर्त अत्यंत फलदायी रहेंगे। यदि आप इन समयों में दान करते हैं, तो उसका आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ जाता है:
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:08 बजे से 04:50 बजे तक (अध्यात्म और साधना के लिए श्रेष्ठ)।
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अमृत चौघड़िया: सुबह 07:13 बजे से 08:55 बजे तक (सौभाग्य वृद्धि के लिए)।
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शुभ चौघड़िया: सुबह 10:36 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक (आर्थिक स्थिरता और सुख-संपदा के लिए)।
पुण्य प्राप्ति के लिए इन 5 वस्तुओं का करें दान
अपरा एकादशी के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार नीचे दी गई वस्तुओं का दान करना विशेष फलदायी माना गया है:
1. जल और मिट्टी के घड़े का दान: ज्येष्ठ मास की गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म है। इस दिन ठंडा जल, शरबत या नए मिट्टी के मटके का दान करने से मानसिक शांति मिलती है और चंद्र दोष दूर होता है।
2. मौसमी फलों का दान: भगवान विष्णु को फलों का भोग प्रिय है। तरबूज, खरबूजा, आम या केले का दान करना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है।
3. पीले वस्त्र और छाता: भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। किसी जरूरतमंद को पीले वस्त्र, छाता या पैरों की सुरक्षा के लिए जूते-चप्पल दान करने से जीवन की राह आसान होती है और दरिद्रता दूर होती है।
4. घी और शक्कर: मंदिर में शुद्ध देसी घी और शक्कर का दान करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है और पारिवारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
दान के समय रखें इन बातों का विशेष ध्यान
शास्त्रों के अनुसार, दान तभी सफल होता है जब वह सही भाव से किया जाए। दान देते समय हमेशा निस्वार्थ भाव रखें और दिखावे से बचें। हमेशा उस व्यक्ति को दान दें जिसे उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। दान के साथ-साथ इस दिन तुलसी पूजन और भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना अनिवार्य है। ऐसा करने से श्रीहरि शीघ्र प्रसन्न होकर जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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