रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट के बीच वैश्विक राजनीति में एक नया मोर्चा खुल गया है। यूरोपीय संघ (EU) द्वारा रूस पर लगाए गए 20वें प्रतिबंध पैकेज में चीनी कंपनियों को शामिल किए जाने पर बीजिंग बुरी तरह भड़क गया है। चीन ने इसे द्विपक्षीय संबंधों की नींव पर प्रहार बताते हुए ईयू को गंभीर परिणाम भुगतने की सीधी चेतावनी दी है।
यूरोपीय संघ के कदम से क्यों भड़का चीन?
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। चीन की नाराजगी के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
-
सहमति का उल्लंघन: चीन का दावा है कि यह कदम दोनों पक्षों के बीच बनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और पिछली सहमतियों के बिल्कुल विपरीत है।
-
सैन्य सहायता का आरोप: यूरोपीय संघ ने आरोप लगाया है कि कई चीनी कंपनियां रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को ‘दोहरे उपयोग’ (Dual-use) वाली संवेदनशील हाई-टेक वस्तुएं और उपकरण मुहैया करा रही हैं।
-
चीन का रुख: बीजिंग ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वह अपनी कंपनियों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए “आवश्यक उपाय” करेगा।
ट्रंप प्रशासन की भी चीन पर टेढ़ी नजर
चीन केवल यूरोपीय संघ ही नहीं, बल्कि अमेरिका के निशाने पर भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने चीनी कंपनियों की कमर तोड़ने के लिए सख्त आर्थिक प्रतिबंधों का सहारा लिया है:
-
हेंगली पेट्रोकेमिकल पर गाज: अमेरिका ने चीन की प्रमुख रिफाइनरी ‘हेंगली पेट्रोकेमिकल’ (दलियान बंदरगाह) पर प्रतिबंध लगा दिया है। आरोप है कि यह रिफाइनरी 2023 से ईरानी कच्चे तेल का आयात कर रही है, जिससे ईरानी सेना को भारी राजस्व मिला है।
-
शिपिंग नेटवर्क पर प्रहार: ईरानी तेल के परिवहन में शामिल लगभग 40 नौवहन कंपनियों और टैंकरों को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
-
होर्मुज की नाकेबंदी: ये प्रतिबंध ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिका ने फारस की खाड़ी के होर्मुज स्ट्रेट पर पहले से ही कड़ी नाकेबंदी कर रखी है।
शी जिनपिंग और ट्रंप की मुलाकात पर संकट के बादल
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये कार्रवाई उस समय हुई है जब कुछ ही हफ्तों बाद डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक प्रस्तावित मुलाकात होनी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान के तेल नेटवर्क को नियंत्रित करना जारी रखेगा, चाहे बिचौलिया कोई भी हो।
भविष्य के संकेत: क्या करेगा चीन?
जानकारों का मानना है कि चीन अब जवाबी कार्रवाई के तौर पर यूरोपीय कंपनियों पर व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है या दुर्लभ धातुओं (Rare Earth Elements) की सप्लाई को बाधित कर सकता है। इससे न केवल चीन-ईयू संबंध खराब होंगे, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी बुरा असर पड़ेगा।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया