ईरान में ‘खामेनेई युग’ का अंत! मातम, धमाके और गूंजते नारे; सर्वोच्च नेता की मौत के बाद पहले जुमे पर सुलग उठा तेहरान

तेहरान/यरूशलेम। ईरान के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसने पूरी दुनिया की सांसें थाम दी हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद आज पहले जुमे की नमाज के दौरान तेहरान की सड़कों पर जो मंजर दिखा, वह दहला देने वाला था। एक तरफ मस्जिदों से मातम की आवाजें आ रही थीं, तो दूसरी तरफ आसमान में इजरायली विमानों की गूंज और जमीन पर होते धमाकों ने ईरान को ‘जहन्नुम’ जैसा बना दिया है। खामेनेई के जाने के बाद ईरान अब नेतृत्व विहीनता और बाहरी हमलों के दोहरे मोर्चे पर खड़ा है।

तेहरान की सड़कों पर ‘रक्त रंजीत’ जुमा

शुक्रवार की सुबह तेहरान की सड़कों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। खामेनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर जारी खींचतान और इजरायल के लगातार होते हवाई हमलों ने आम जनता को खौफ में डाल दिया है। जुमे की नमाज के लिए जुटी भीड़ में एक तरफ ‘अमेरिका और इजरायल की बर्बादी’ के नारे लग रहे थे, तो दूसरी तरफ कई इलाकों में जश्न और विरोध की छिटपुट खबरें भी आईं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया है, क्योंकि उन्हें डर है कि खामेनेई की मौत के बाद देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति न बन जाए।

इजरायली बमबारी और खामेनेई की अंतिम विदाई

हैरान करने वाली बात यह है कि जब ईरान अपने सबसे शक्तिशाली नेता के जाने का शोक मना रहा था, ठीक उसी वक्त इजरायली वायुसेना ने तेहरान के सैन्य ठिकानों पर पिन-पॉइंट स्ट्राइक की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के मिसाइल कंट्रोल सेंटर्स को निशाना बनाया गया है ताकि वह जवाबी कार्रवाई न कर सके। खामेनेई की मौत को इजरायल और अमेरिका अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं, जबकि ईरान के कट्टरपंथी गुट इसे ‘शहादत’ बताकर बदला लेने की कसमें खा रहे हैं। तेहरान के आसमान में उठता काला धुआं गवाही दे रहा है कि ईरान अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है।

क्या ढह जाएगा ईरान का इस्लामिक साम्राज्य?

खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान का अगला ‘सुप्रीम लीडर’ कौन होगा? क्या ईरान में अब लोकतंत्र की आवाज बुलंद होगी या फिर सेना (IRGC) पूरी सत्ता अपने हाथ में ले लेगी? जानकारों का मानना है कि खामेनेई के बिना ईरान की ‘प्रॉक्सि वॉर’ (हमास, हिजबुल्लाह और हूती) कमजोर पड़ सकती है। अमेरिका और इजरायल इस मौके का फायदा उठाकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए दफन करने की फिराक में हैं। मिडिल ईस्ट के इस ‘पावर गेम’ में अब ईरान का वजूद दांव पर लगा है।

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