“यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी…” सीएम योगी ने IAS-IPS के पुराने विवाद पर हंसते हुए कसा तंज, पुलिस रिफॉर्म्स पर विरोधियों को घेरा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग में नए नियुक्त हुए 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र बांटे। इस मौके पर उन्होंने यूपी पुलिस में साल 2017 के बाद आए क्रांतिकारी बदलावों और आधुनिक पुलिस रिफॉर्म्स पर खुलकर बात की। सीएम योगी ने राज्य में लागू की गई पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली (Police Commissionerate System) का विरोध करने वालों पर हंसते हुए बेहद तीखा निशाना साधा।

मुख्यमंत्री ने आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के बीच की पुरानी कार्यशैली पर चुटकी लेते हुए कहा कि पहले आईपीएस अफसरों को आईएएस इस कदर दबाते थे कि फाइलें ही गायब हो जाती थीं। आइए जानते हैं सीएम योगी के इस बड़े बयान और यूपी पुलिस की नई व्यवस्था के बारे में।

“फाइल बंद तो बंद, यमराज भी ढूंढ नहीं पाते थे”

सीएम योगी ने अपने संबोधन में बताया कि पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम देश में 1972 से चला आ रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे लागू करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा था। इसका कारण आईएएस एसोसिएशन द्वारा किया जाने वाला विरोध था, क्योंकि इस सिस्टम के आने से मजिस्ट्रेट (IAS) के कई अधिकार सीधे पुलिस कमिश्नर (IPS) के पास चले जाते हैं।

सीएम योगी ने हंसते हुए कहा:

“पहले आईपीएस को आईएएस ऐसा दबाते थे कि एक बार फाइल बंद हो जाए तो दोबारा खुलती ही नहीं थी। फाइल पता नहीं कहां दबी पड़ी रहती थी कि अगर यमराज भी आ जाएं, तो उन्हें भी वह फाइल नहीं मिल पाती थी। हमने राजनीतिक हिम्मत दिखाई और प्रदेश के सात बड़े जनपदों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को सफलतापूर्वक लागू कर दिया।”

उन्होंने साफ कहा कि जिन्हें पुलिसिंग और प्रशासनिक सुधारों की जानकारी नहीं है, वही लोग आज कमिश्नरेट व्यवस्था पर उंगली उठा रहे हैं।

“2017 से पहले जब IPS ही सुरक्षित नहीं था, तो आम जनता का क्या होता?”

साल 2017 के पहले की कानून-व्यवस्था की याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने मुरादाबाद की एक पुरानी घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले यूपी में हर दूसरे-तीसरे दिन दंगे होते थे और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहता था।

उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में दंगाइयों ने डीआईजी (DIG) स्तर के एक बड़े पुलिस अधिकारी को घेरकर बेरहमी से पीटा था और उन्हें मरा हुआ समझकर छोड़कर भाग गए थे। सीएम योगी ने सवाल उठाया कि जब राज्य में आईपीएस स्तर का अधिकारी ही सुरक्षित नहीं था, तो एक आम नागरिक, महिला, व्यापारी या बेटी की सुरक्षा की कल्पना कैसे की जा सकती थी? उन्होंने यह भी जोड़ा कि उस समय अपराधियों को बचाने के लिए राजनीतिक दबाव बनाए जाते थे, लेकिन हमारी सरकार ने पैरवी की और उन सभी दंगाइयों को ऐसी सख्त सजा दिलवाई कि उनकी आने वाली पीढ़ियां भी अपराध करना भूल जाएंगी।

‘हाईटेक’ हुई यूपी पुलिस: अब प्रदेश की सबसे ऊंची इमारतें हैं पुलिस बैरक

यूपी पुलिस के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में हुए सुधारों को रेखांकित करते हुए सीएम योगी ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातें सामने रखीं:

  • आधुनिक बैरक: पहले पुलिसकर्मियों को जर्जर और टूटे हुए बैरकों में रहना पड़ता था। आज प्रदेश के 56 जिलों में यदि सबसे ऊंची और आधुनिक कोई सरकारी इमारत है, तो वह यूपी पुलिस की बैरक है।

  • भर्ती और ट्रेनिंग में स्पीड: पहले बड़े पैमाने पर भर्तियां कोर्ट में फंसी रहती थीं। सरकार ने पैरवी कर कोर्ट से आदेश लिया और सवा दो लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की पारदर्शी भर्ती की। प्रदेश में ट्रेनिंग की क्षमता को 17 हजार से बढ़ाकर सीधे 60 हजार किया गया, जिससे अब जवानों को ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों या मिलिट्री सेंटर्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

  • फोरेंसिक और साइबर लैब का जाल: 25 करोड़ की आबादी वाले यूपी में पहले केवल 4 फोरेंसिक लैब थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 25 हो गई है। साथ ही हर जिले में मोबाइल फोरेंसिक लैब और साइबर थानों की शुरुआत की गई है।

9 साल में 9 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

सीएम योगी ने कहा कि पहले यूपी के युवाओं के सामने पहचान का संकट था और वे बाहर जाकर यह बताने में कतराते थे कि वे उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। लेकिन आज हमारी पारदर्शी नीतियों के कारण पिछले 9 वर्षों में 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। राज्य में पूरी तरह सुरक्षित माहौल होने के कारण 32 हजार बड़े कारखाने और 96 लाख एमएसएमई (MSME) उद्योग काम कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए हैं।

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