श्रीनगर/नई दिल्ली। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की कार्यशैली और विशेष रूप से कांग्रेस की भूमिका पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। अब्दुल्ला का मानना है कि गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वह एकजुटता और मजबूती नहीं दिखाई, जिसकी उनसे अपेक्षा की गई थी।
“कांग्रेस ने नहीं निभाई अपनी जिम्मेदारी”
अब्दुल्ला ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय गठबंधन से हमारी सबसे बड़ी शिकायत यही है कि हमें उम्मीद थी कि वे हमारे हक और मुद्दों के लिए अधिक जोरदार तरीके से आवाज उठाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह वास्तव में दुखद है कि मुख्य पार्टी होने के नाते कांग्रेस ने वह सक्रिय भूमिका नहीं निभाई जिसकी हम अपेक्षा कर रहे थे।”
गठबंधन केवल चुनावों के लिए नहीं: अब्दुल्ला
तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अब्दुल्ला ने गठबंधन की बैठकों में नियमितता की कमी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “INDIA गठबंधन की नियमित बैठकें होना बहुत जरूरी है। यह गठबंधन सिर्फ चुनावों के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य के लिए बना है। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इस बात को कई बार नजरअंदाज किया गया है।” उन्होंने अपील की कि गठबंधन को केवल चुनावी समझौतों तक सीमित रहने के बजाय देश के भविष्य से जुड़े बड़े मुद्दों पर निरंतर चर्चा करनी चाहिए।
भाजपा के साथ जाने की संभावनाओं पर पूर्ण विराम
गठबंधन से नाराजगी के बावजूद फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि वे भाजपा के साथ कभी नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, “यह बिल्कुल साफ है कि हम भारतीय जनता पार्टी के साथ नहीं हैं और कभी नहीं होंगे। हम INDIA गठबंधन के ही प्रतिबद्ध सदस्य हैं। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में यह गठबंधन राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को अधिक मजबूती से उठाएगा।”
राज्य का दर्जा बहाल होने की उम्मीद
जम्मू-कश्मीर के मौजूदा राजनीतिक हालात पर बात करते हुए अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और हमारे सांसदों को इस संबंध में आश्वासन दिया है। संसद और सुप्रीम कोर्ट में भी केंद्र ने प्रतिबद्धता जताई है। अब देखना यह है कि इसमें वे और कितना समय लेते हैं।”
युवा नेताओं को नसीहत: “जनता को धोखा न दें”
पांच दशकों से अधिक का राजनीतिक अनुभव रखने वाले दिग्गज नेता ने उभरते युवा नेताओं को ईमानदारी की सलाह दी। उन्होंने कहा, “मैं आज के नेताओं से यही कहूंगा कि आप जो भी करें, पूरी ईमानदारी और स्पष्टता के साथ करें। जनता बहुत समझदार होती है, उसे धोखा न दें।” उन्होंने युवाओं से चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने और गरीबी व अज्ञानता को दूर करने के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
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