‘सुपर अल नीनो’ का खौफ: भारत में क्यों बरस रही है आग? जानें कब आएगा मॉनसून और किन राज्यों में होने वाली है भारी बारिश

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में अप्रैल के महीने में ही पारा 47 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिले भट्टी की तरह तप रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस भीषण गर्मी के पीछे ‘सुपर अल नीनो’ (Super El Nino) का हाथ है। जहां उत्तर भारत लू (Heatwave) से जूझ रहा है, वहीं दक्षिण भारत के केरल में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। आइए समझते हैं कि आखिर यह ‘सुपर अल नीनो’ क्या बला है और इस साल मॉनसून पर इसका क्या असर पड़ेगा।

क्या है ‘सुपर अल नीनो’ जो आग बरसा रहा है?

सामान्य शब्दों में, जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, तो उसे ‘अल नीनो’ कहते हैं। लेकिन जब यह तापमान औसत से 2°C या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है।

  • तापमान का रिकॉर्ड: विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 का यह चक्र पिछले 140 वर्षों के सबसे शक्तिशाली चरणों में से एक हो सकता है।

  • भट्टी बना उत्तर भारत: उत्तर और मध्य भारत में बादल न होने और ‘सुपर अल नीनो’ के प्रभाव से हवा में नमी खत्म हो गई है। शुष्क हवाओं और सीधे पड़ रही सूरज की किरणों ने आसमान से आग बरसाना शुरू कर दिया है।

केरल में भारी बारिश: 4 जिलों में ‘येलो अलर्ट’ जारी

भीषण गर्मी के बीच केरल के लिए मौसम विभाग (IMD) ने राहत और चेतावनी दोनों दी है। अरब सागर से आ रही नमी और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के कारण केरल में प्री-मॉनसून गतिविधियां तेज हो गई हैं।

  • इन जिलों में अलर्ट: पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर और कासरगोड में 29 अप्रैल के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

  • कितनी होगी बारिश: इन क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक भारी बारिश हो सकती है।

इस साल कैसा रहेगा मॉनसून? IMD की डराने वाली भविष्यवाणी

भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए मॉनसून सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन इस साल ‘सुपर अल नीनो’ ने चिंता बढ़ा दी है।

  • सामान्य से कम बारिश: IMD के मुताबिक, 2026 में मॉनसून “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना है। लंबी अवधि के औसत (LPA) का केवल 92% बारिश होने का अनुमान है।

  • कब आएगा मॉनसून: मॉनसून अपने नियत समय (1 जून के आसपास) केरल पहुंच सकता है, लेकिन जुलाई और अगस्त में अल नीनो के पूरी तरह हावी होने से बारिश की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी।

खेती और अर्थव्यवस्था पर संकट

मॉनसून के कमजोर रहने और तापमान के ऊंचे स्तर पर बने रहने से खरीफ फसलों, विशेषकर धान, गन्ना और दलहन की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है। पानी की कमी और बिजली की बढ़ती मांग आने वाले महीनों में एक बड़ी चुनौती बन सकती है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि लोग गर्मी से बचने के लिए सतर्क रहें और पानी का संचयन करें।

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