हिंद महासागर में भीषण जंग: अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने टॉरपीडो से उड़ाया ईरानी युद्धपोत, 80 की मौत; दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार ऐसा प्रहार

वॉशिंगटन/कोलंबो: हिंद महासागर के शांत पानी में छिड़ी अचानक जंग ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी खूनी संघर्ष अब समुद्र की गहराइयों तक पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में, अमेरिकी नौसेना की एक परमाणु पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत ‘IRIS Dena’ को टॉरपीडो से हमला कर समुद्र में डुबो दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ‘शांत मौत’ (Quiet Death) करार दिया है।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे घातक समुद्री प्रहार

पेंटागन द्वारा जारी बयान में बताया गया कि ईरानी युद्धपोत को उस समय निशाना बनाया गया जब वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था। रक्षा मंत्री हेगसेथ के अनुसार, 1945 के बाद यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का इस्तेमाल कर दुश्मन के जहाज को नेस्तनाबूद किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “हम यह युद्ध जीतने के लिए लड़ रहे हैं और ईरानी नौसेना की क्षमताएं हर घंटे खत्म हो रही हैं।”

भारत से लौट रहा था युद्धपोत, मची चीख-पुकार

हैरान करने वाली बात यह है कि डूबा हुआ ईरानी युद्धपोत ‘IRIS Dena’ हाल ही में भारत में आयोजित ‘मिलन’ (MILAN) नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेकर वापस लौट रहा था। विशाखापत्तनम से वापसी के दौरान श्रीलंका के गाले बंदरगाह से लगभग 25 मील दूर यह हमला हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और श्रीलंकाई नौसेना के अनुसार, हमले के बाद समुद्र में तेल की मोटी परत फैल गई और जहाज चंद मिनटों में लहरों में समा गया।

लाशों का ढेर और 140 से ज्यादा लापता

श्रीलंकाई अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जहाज पर करीब 180 से अधिक लोग सवार थे। अब तक 80 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि 32 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाव अभियान में जुटे श्रीलंकाई नौसेना के प्रवक्ता कमांडर बुद्धिका संपथ ने बताया कि अभी भी 148 से अधिक नाविक लापता हैं। घायल नाविकों का इलाज गाले के सरकारी अस्पताल में चल रहा है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान की घेराबंदी

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का हिस्सा बताया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिकी सेना अब तक ईरान के 9-17 युद्धपोतों को नष्ट कर चुकी है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि ईरान की पूरी नौसेना जल्द ही समुद्र की तलहटी में होगी। उधर, रूस और चीन ने इस हमले की निंदा की है, लेकिन अमेरिका ने उन्हें ‘अप्रासंगिक’ बताते हुए अपना अभियान जारी रखने की बात कही है।

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