इंफाल। मणिपुर एक बार फिर हिंसा और तनाव की आग में झुलस उठा है। बिष्णुपुर जिले में हुए बम धमाके में दो मासूम बच्चों की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार रात इंफाल की सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग हाथों में जलती मशालें लेकर उतरे। प्रशासन द्वारा लागू निषेधाज्ञा (Section 144) को तोड़ते हुए निकाली गई इस रैली ने उस समय हिंसक रूप ले लिया जब सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई।
मशालों के साथ सड़कों पर उतरा जनसैलाब
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत गुरुवार शाम करीब 7 बजे सिंगजामेई इलाके से हुई। हजारों प्रदर्शनकारी 7 अप्रैल को त्रोंग्लाओबी में हुए बम ब्लास्ट के दोषियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। ‘न्याय दो’ के नारों के साथ यह विशाल मशाल रैली जैसे ही चिंगमथाक पहुंची, माहौल तनावपूर्ण हो गया। यह इलाका मुख्यमंत्री आवास और पुलिस मुख्यालय के बेहद करीब है, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर थीं।
आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज: रणक्षेत्र बना इंफाल
सुरक्षाबलों ने भीड़ को प्रतिबंधित क्षेत्र में बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित जनता पीछे हटने को तैयार नहीं थी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जवानों ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज का सहारा लिया। जवाबी कार्रवाई में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने की भी खबर है। इस भगदड़ और झड़प में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कम से कम पांच लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
आरएएफ जवान पर हमले के दो आरोपी गिरफ्तार
एक ओर जहां इंफाल जल रहा है, वहीं दूसरी ओर चुराचांदपुर जिले से पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों पर गोलीबारी करने के आरोप में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने सीलमत पुल के पास रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान को निशाना बनाया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस ने रेंगकाई इलाके में नाकेबंदी के दौरान एक वाहन से इन दोनों को दबोचा।
जातीय हिंसा का दंश झेल रहा मणिपुर
मणिपुर मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच चल रहे जातीय संघर्ष की चपेट में है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस हिंसा में 260 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों की संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। वर्तमान में पूरे इलाके में शाम 5 बजे से सुबह 5 बजे तक का कड़ा कर्फ्यू लागू है, फिर भी मासूमों की मौत ने लोगों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर कर दिया है।
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