अधिकमास का पहला शनिवार: शनि देव को प्रसन्न करने के 5 अचूक उपाय, साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी मुक्ति

अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाला शनिवार शनि देव की कृपा पाने का एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ अवसर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास में किए गए शुभ कार्यों और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में दस गुना अधिक प्राप्त होता है। यदि आप शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या किसी अन्य दोष से पीड़ित हैं, तो अधिकमास के इस पहले शनिवार को शाम के समय किए गए ये 5 उपाय आपके जीवन से बाधाओं को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

शनि दोष निवारण के 5 विशेष उपाय

ये उपाय सूर्यास्त के बाद करना अधिक प्रभावी माना गया है:

  1. पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक: पीपल का वृक्ष साक्षात् शनि देव का वास स्थान माना जाता है। शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। दीपक जलाते समय मन ही मन अपनी मनोकामना कहें और शनि देव से अपनी भूलों के लिए क्षमा याचना करें।

  2. हनुमान चालीसा और शनि चालीसा का पाठ: हनुमान जी शनि देव के आराध्य और रक्षक माने जाते हैं। शनिवार की शाम शनि चालीसा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह संयुक्त पाठ मानसिक अशांति को दूर करता है और साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने में अचूक माना जाता है।

  3. काले कुत्ते की सेवा: शनि देव काले कुत्ते में विशेष रूप से वास करते हैं। इस शनिवार शाम को काले कुत्ते को उड़द दाल के पकौड़े या रोटी खिलाएं। यह उपाय कुंडली में चल रहे शनि के नकारात्मक प्रभाव को शांत करने में बहुत प्रभावशाली है।

  4. छाया दान का महत्व: एक छोटी कटोरी में शुद्ध सरसों का तेल लें और उसमें एक सिक्का डालें। इस तेल में अपना चेहरा देखें (छाया दान) और फिर इसे किसी गरीब, मजदूर या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। यह उपाय शनि दोष से मुक्ति का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।

  5. काली वस्तुओं का दान: अपनी क्षमतानुसार शनिवार को काली वस्तुओं का दान करें। आप काले चने, उड़द की दाल, काला कंबल, या लोहे की वस्तुओं का दान कर सकते हैं। याद रखें, दान सदैव निस्वार्थ भाव से किया जाना चाहिए, जिससे आर्थिक तंगी दूर होती है और जीवन में स्थिरता आती है।

अधिकमास का शनिवार क्यों है खास?

अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित है, किंतु शनिवार का दिन होने से यह भगवान विष्णु और शनि देव दोनों के आशीर्वाद प्राप्त करने का अद्भुत संयोग है। शनि देव न्याय के देवता हैं और जो जातक इस दौरान कर्म सुधारने का संकल्प लेता है, उस पर शनि देव की कृपा शीघ्र होती है।

विशेष सलाह: उपाय करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें। अधिकमास में किया गया आपका यह प्रयास आपके जीवन से कष्टों का निवारण कर सुख-समृद्धि के नए द्वार खोल सकता है।

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