बहराइच दरगाह शरीफ में करोड़ों का खेल? जांच के दायरे में 13 सदस्यीय कमेटी, लखनऊ तक मंचा हड़कंप

बहराइच। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध आस्था केंद्र, दरगाह सैयद सालार मसूद गाजी से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे और अन्य सरकारी व गैर-सरकारी मदों से आने वाली भारी-भरकम रकम में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी और गबन की गंभीर शिकायत दर्ज की गई है। इस सनसनीखेज शिकायत के बाद जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है, वहीं बहराइच के जिलाधिकारी (डीएम) भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं।

सुन्नी वक्फ बोर्ड की शिकायत पर डीएम का बड़ा एक्शन, बैठाई गई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से बहराइच के जिलाधिकारी को भेजे गए एक गोपनीय व बेहद संवेदनशील पत्र से हुई। इस आधिकारिक पत्र में न केवल करोड़ों रुपये के गबन की बात कही गई है, बल्कि वर्तमान में कार्यरत 13 सदस्यीय दरगाह कमेटी के गठन की वैधानिकता पर भी बड़े सवाल खड़े किए गए हैं। वक्फ बोर्ड का स्पष्ट आरोप है कि इस मौजूदा कमेटी का गठन तय नियमों और वक्फ बोर्ड के कानूनी प्रावधानों को ताक पर रखकर, बिल्कुल विपरीत तरीके से किया गया है।

मामले की गंभीरता और इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया। डीएम ने मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन कर दिया। इस जांच दल में शहर के सिटी मजिस्ट्रेट, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शामिल किया गया, जिससे यह साफ है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है।

तीन सदस्यीय टीम ने सौंपी रिपोर्ट, बयानों के आधार पर कड़े फैसले की तैयारी

प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने बहराइच दरगाह कमेटी के सदर (अध्यक्ष) सहित तमाम प्रमुख पदाधिकारियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े जिम्मेदारों के बयान दर्ज किए हैं। गहन पूछताछ और दस्तावेजों की स्क्रूटनी करने के बाद जांच कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को सौंप दी है।

इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर बोलते हुए बहराइच के जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से मिले पत्र के आधार पर तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी करवा ली गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पूरी रिपोर्ट का बारीकी से अवलोकन करने के बाद इसे अग्रिम दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश शासन और सुन्नी वक्फ बोर्ड को सीधे लखनऊ भेजा जाएगा। जिलाधिकारी ने पुष्टि की कि पत्र में मुख्य रूप से वित्तीय गबन और वर्तमान कमेटी के अवैध रूप से काम करने का गंभीर जिक्र है।

प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह सख्त; 15 दिनों में मांगी फाइनल रिपोर्ट

इस बड़े वित्तीय घोटाले की गूंज अब उत्तर प्रदेश सरकार के गलियारों तक भी पहुंच चुकी है। बहराइच जिले के प्रभारी व कैबिनेट मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि किसी भी आस्था स्थल पर श्रद्धालुओं की भावना और उनके पैसे के साथ खिलवाड़ या लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कैबिनेट मंत्री ने जिलाधिकारी को कड़े निर्देश जारी करते हुए दरगाह शरीफ में हुई इस कथित लूट और गबन की अंतिम जांच को ठीक 15 दिनों के भीतर पूरी कर सीधे शासन को रिपोर्ट भेजने का अल्टीमेटम दिया है।

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने की 17 बिंदुओं पर SIT जांच की मांग

इस वित्तीय हेराफेरी के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर वासित अली ने इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और शासन को एक पत्र लिखा है। उन्होंने दरगाह में पिछले लंबे समय से चल रहे कथित खेल को उजागर करने के लिए कुल 17 गंभीर बिंदुओं को रेखांकित करते हुए इस पूरे घोटाले की जांच सीधे विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) से कराने की पुरजोर मांग की है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में दरगाह कमेटी के कई बड़े चेहरों पर कानूनी गाज गिर सकती है।

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