गंगा एक्सप्रेसवे: 519 गांवों के लिए ‘समृद्धि का हाईवे’, 12 जिलों में 47 हजार करोड़ के निवेश से रोजगार की बहार

Ganga Expressway Industrial Development: उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है। यह एक्सप्रेसवे केवल मेरठ से प्रयागराज की दूरी ही कम नहीं करेगा, बल्कि इसके किनारे विकसित होने वाले 12 औद्योगिक नोड्स (IMLC) राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। 6,507 एकड़ भूमि पर फैलने वाले इन क्लस्टर्स से 12 जिलों के 519 गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

यूपीडा (UPEIDA) के मुताबिक, अब तक ₹46,660 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं, जो इस क्षेत्र में गोदामों, कारखानों और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के जरिए रोजगार की नई इबारत लिखेंगे।


12 जिलों के 12 इंडस्ट्रियल नोड्स: कहाँ कितनी जमीन?

गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे हर जिले की भौगोलिक विशेषता के आधार पर ‘इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर’ (IMLC) डिजाइन किए गए हैं:

जिला नोड का क्षेत्रफल (एकड़) मुख्य विशेषता / संभावना
मेरठ 529 डेटा सेंटर, वेयरहाउसिंग और स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री का हब।
बुलंदशहर 2,798 सबसे बड़ा क्लस्टर; जेवर एयरपोर्ट के पास होने से लॉजिस्टिक्स हब।
संभल 591 हॉर्न और बोन क्राफ्ट को वैश्विक बाजार और बेहतर दाम।
मेरठ 529 दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी का लाभ।
हापुड़ 304 धार्मिक पर्यटन (गढ़मुक्तेश्वर) और कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स।
अमरोहा 348 पारंपरिक ढोलक उद्योग और एग्रो-प्रोसेसिंग को नई रफ्तार।
बदायूं 269 विशाल इंडस्ट्रियल टाउनशिप और शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश।
शाहजहांपुर 252 3.5 किमी हवाई पट्टी और युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र।
हरदोई 335 नॉलेज पार्क और टेक्सटाइल पार्क का निर्माण।
उन्नाव 333 लेदर उद्योग को मजबूती और ‘ट्राई-सिटी’ इकोनॉमिक मॉडल।
रायबरेली 232 रेलवे कोच फैक्ट्री के पास एंसिलरी इंडस्ट्रीज का विस्तार।
प्रतापगढ़ 263 आंवला उद्योग का वैश्विक निर्यात और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स।
प्रयागराज 251 संगम नगरी में विशाल कमर्शियल हब और पर्यटन को गति।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा लाभ?

  • रोजगार की बरसात: एक्सप्रेसवे के किनारे गोदाम (Warehouse) और कारखाने खुलने से स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।

  • किसानों की बल्ले-बल्ले: एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स और कोल्ड स्टोरेज बनने से हरदोई, प्रतापगढ़ (आंवला) और हापुड़ (आलू) के किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिलेगा।

  • बुनियादी ढांचे में सुधार: 519 गांवों में बिजली, सड़क और पानी जैसी सुविधाओं का विस्तार होगा। औद्योगिक गतिविधियों के कारण रियल एस्टेट और स्थानीय बाजारों में भी उछाल आएगा।

निवेश की चुनौती और भविष्य

यूपीडा के सामने अब 987 निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की चुनौती है। इसमें ई-कॉमर्स सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के प्रस्ताव प्रमुख हैं। जेवर एयरपोर्ट और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ने के कारण बुलंदशहर और मेरठ के क्लस्टर्स ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाले हैं।

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