नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध का असर अब भारतीय रसोई तक पहुंच गया है। देश में गहराते एलपीजी (LPG) संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इस आपातकालीन बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए। ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे भारत सहित कई एशियाई देशों में ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट: क्यों थमी भारत की रफ्तार?
भारत अपनी जरूरत की 62% एलपीजी और लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब 85% गैस सप्लाई अकेले सऊदी अरब से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते आती है।
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सप्लाई बाधित: ईरान द्वारा इस समुद्री मार्ग को बाधित करने से टैंकरों की आवाजाही रुक गई है।
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बड़ी निर्भरता: भारत में हर साल 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। अगर यह रास्ता ज्यादा दिनों तक बंद रहा, तो देश में ईंधन का बड़ा अकाल पड़ सकता है।
सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ‘एस्मा’ लागू
गैस की किल्लत और जनता के संभावित गुस्से को देखते हुए केंद्र सरकार ने एस्मा (ESMA – Essential Services Maintenance Act) लागू कर दिया है। सरकार की प्राथमिकता अब इस प्रकार है:
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घरेलू उपभोक्ता: कुल खपत का 87% हिस्सा घरों में इस्तेमाल होता है, जिसे सरकार हर हाल में सुरक्षित रखना चाहती है।
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इंडस्ट्रियल यूनिट्स: उद्योगों को दी जाने वाली गैस सप्लाई में भारी कटौती की गई है।
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कमर्शियल सिलेंडर: होटल और रेस्टोरेंट को मिलने वाले सिलेंडरों की संख्या कम कर दी गई है, जिससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कामकाज ठप होने का डर है।
दूसरे रास्तों की तलाश में विदेश मंत्रालय
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खाड़ी देशों के साथ वैकल्पिक सप्लाई रूट पर चर्चा की। पेट्रोलियम मंत्रालय उन देशों से भी संपर्क साध रहा है जहां से पाइपलाइन या अन्य समुद्री मार्गों के जरिए तत्काल गैस मंगवाई जा सके। सरकार का मानना है कि दो दशक पहले की तुलना में आज देश की निर्भरता एलपीजी पर बहुत ज्यादा है, इसलिए सप्लाई चेन को दोबारा बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
क्या है वर्तमान स्थिति?
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घरेलू सप्लाई: फिलहाल कंट्रोल में है, लेकिन बुकिंग के नियमों को सख्त किया जा सकता है।
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कमर्शियल किल्लत: होटल और ढाबों पर गैस की कमी के चलते खाने-पीने की चीजें महंगी होने की आशंका है।
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स्टॉक: भारत के पास सीमित दिनों का ही रणनीतिक भंडार है, जिसे बचाने के लिए राशनिंग शुरू कर दी गई है।
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