ईरान युद्ध के बीच ‘सुपरपावर’ बना सोना: 35 ट्रिलियन डॉलर का हुआ ग्लोबल मार्केट, भारत और ब्रिटेन की संयुक्त GDP से भी 5 गुना बड

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते ईरान-इजरायल युद्ध के संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। लेकिन इस अनिश्चितता के दौर में सोना (Gold) एक ऐसी अजेय शक्ति बनकर उभरा है, जिसने वैश्विक बाजार में अपनी बादशाहत कायम कर ली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोने का कुल बाजार मूल्य (Market Cap) अब 35 ट्रिलियन डॉलर के अविश्वसनीय आंकड़े को पार कर गया है। यह आंकड़ा इतना विशाल है कि यह भारत और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों की संयुक्त जीडीपी (GDP) से भी पांच गुना अधिक है।

युद्ध और अनिश्चितता ने सोने को बनाया ‘सुरक्षित निवेश’

जैसे-जैसे ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है, दुनिया भर के निवेशकों ने शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सोने में लगाना शुरू कर दिया है। आर्थिक शब्दावली में इसे ‘सेफ हेवन’ (Safe Haven) निवेश कहा जाता है। जब भी युद्ध या वैश्विक मंदी का खतरा मंडराता है, सोने की मांग और उसकी कीमतों में जबरदस्त उछाल आता है। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों ने अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजारों में अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

35 ट्रिलियन डॉलर की ताकत: दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों से भी आगे

सोने का यह विशालकाय मार्केट कैप दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों जैसे ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया की कुल संपत्ति से भी कई गुना अधिक है। अगर हम देशों की अर्थव्यवस्था से इसकी तुलना करें, तो यह अमेरिका की कुल जीडीपी के बराबर पहुंचने को तैयार है। भारत की करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और ब्रिटेन की लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को मिला दिया जाए, तो भी सोने का साम्राज्य उनसे कहीं अधिक शक्तिशाली और स्थिर नजर आता है।

केंद्रीय बैंकों की ‘गोल्ड होल्डिंग’ में भारी इजाफा

सिर्फ आम निवेशक ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Banks) भी अब अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की जगह सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। चीन, भारत और रूस जैसे देशों के केंद्रीय बैंकों ने पिछले एक साल में रिकॉर्ड मात्रा में सोने की खरीदारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर पर निर्भरता कम करने और युद्ध जैसी स्थितियों में अपनी मुद्रा को गिरने से बचाने के लिए दुनिया भर की सरकारें अब ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ की ओर वापस मुड़ रही हैं।

क्या और बढ़ेंगे सोने के दाम? एक्सपर्ट्स की राय

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव और अधिक बढ़ता है या यह पूर्ण युद्ध का रूप लेता है, तो सोने की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत में शादियों के सीजन के कारण भी सोने की मांग चरम पर है। आने वाले समय में सोना न केवल एक निवेश का साधन, बल्कि एक ‘वैश्विक मुद्रा’ के रूप में अपनी पकड़ और मजबूत करेगा। 35 ट्रिलियन डॉलर का यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक युग में भी पीली धातु का जादू कम नहीं हुआ है।

Check Also

‘झोला उठाने का समय आ गया’: दवा की कीमतों और कैंसर इलाज के खर्च को लेकर केंद्र पर बरसी कांग्रेस; पूछे तीखे सवाल

देशभर में जीवनरक्षक दवाओं की बढ़ती कीमतों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज …