कश्मीर में स्थानीय भर्ती में ऐतिहासिक गिरावट, अब जंगल में विदेशी आतंकियों के खिलाफ ‘फाइनल वार’

श्रीनगर/नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ सुरक्षाबलों ने एक ऐसी निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है, जिसने सीमा पार बैठे आकाओं की नींद उड़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों की नई रणनीति और घाटी के बदलते मिजाज का नतीजा है कि आज कश्मीर में ‘स्थानीय आतंकवाद’ (Local Terrorism) अपने खात्मे की कगार पर है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, घाटी में अब स्थानीय युवाओं की भर्ती न के बराबर रह गई है, हालांकि करीब 65 विदेशी आतंकी अब भी चुनौती बने हुए हैं जिन्हें ढेर करने के लिए सुरक्षाबलों ने अपना गियर बदल दिया है।

भर्ती पर ब्रेक: अब युवाओं का ‘ब्रेनवॉश’ हुआ मुश्किल

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी कामयाबी स्थानीय युवाओं का आतंकी गुटों से मोहभंग होना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वर्तमान में घाटी में इक्का-दुक्का स्थानीय युवक ही सक्रिय हैं। यदि कहीं से भर्ती की खबर आती भी है, तो सुरक्षा बल तुरंत एक्शन लेकर उसे विफल कर देते हैं। दिल्ली धमाकों के बाद से सतर्कता और बढ़ा दी गई है ताकि कोई भी नया तत्व कट्टरपंथ का शिकार न हो सके। अब सुरक्षाबलों का पूरा फोकस आतंकी सपोर्ट सिस्टम और उन ‘सहानुभूति’ रखने वाले स्लीपर सेल्स को खत्म करने पर है जो आतंकियों को रसद और सूचना पहुंचाते हैं।

शहरी बस्तियों से ऊंचे पहाड़ों की ओर शिफ्ट हुआ ‘वारजोन’

आतंकियों ने अपनी जान बचाने के लिए रणनीति बदलते हुए अब शहरी इलाकों के बजाय घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को अपना ठिकाना बनाया है। इसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी अपनी ऑपरेशन शैली को पूरी तरह बदल दिया है:

  • 7,000 फीट पर ऑपरेटिंग बेस: ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों में आतंकियों को ढूंढने के लिए सुरक्षाबलों ने 7,000 फीट तक की ऊंचाई पर अपने बेस स्थापित किए हैं।

  • जंगल वॉरफेयर: अब सर्च ऑपरेशन केवल बस्तियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जंगलों के भीतर आतंकियों की मांद को तबाह किया जा रहा है।

  • जम्मू और चिनाब वैली पर नजर: पिछले कुछ समय में जम्मू संभाग और चिनाब वैली में बढ़ी आतंकी हरकतों को देखते हुए वहां अतिरिक्त घेराबंदी की गई है।

युवा अफसरों की ‘ग्रे हाउंड्स’ ट्रेनिंग और पुनर्गठन

आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का कायाकल्प किया गया है। अब इस ग्रुप में युवा और जोश से भरे अधिकारियों को नेतृत्व सौंपा गया है। इन टीमों को विशेष रूप से ‘जंगल युद्ध’ (Jungle Warfare) के लिए तैयार किया जा रहा है।

खास बात यह है कि इन टीमों को आंध्र प्रदेश की मशहूर ‘ग्रे हाउंड्स’ यूनिट और सेना की पैरा स्पेशल फोर्सेज के साथ मिलकर ट्रेनिंग दी गई है, ताकि वे दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में आतंकियों का काल बन सकें।

विदेशी आतंकियों की संख्या अब भी चुनौती

भले ही स्थानीय स्तर पर समर्थन सिमट गया हो, लेकिन करीब 65 विदेशी आतंकी अब भी जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में छिपे हुए हैं। ये आतंकी मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के बताए जा रहे हैं जो आधुनिक हथियारों से लैस हैं। सुरक्षाबलों का मानना है कि स्थानीय समर्थन के बिना ये विदेशी आतंकी लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगे और जल्द ही इनका भी सफाया कर दिया जाएगा।

Check Also

‘अपना एजेंडा चलाना बंद करो’, UN में भारत ने पाकिस्तान और चीन को लताड़ा; मंच के दुरुपयोग पर दी कड़ी नसीहत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा की उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान भारत ने एक बार …