लखनऊ में ‘किले या मस्जिद’: मलिहाबाद में जागा ऐतिहासिक विवाद, जानें क्या है पासी समाज का दावा और मुस्लिम पक्ष का रुख

लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में एक प्राचीन स्थल को लेकर नया विवाद गहरा गया है। पासी समाज ने इस स्थान को महाराजा कंस पासी के प्राचीन किले और मंदिर का अवशेष बताते हुए इस पर अपनी दावेदारी पेश की है। वहीं, दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने इसे सदियों से मस्जिद और मकबरा होने का दावा किया है। इस विवाद ने इलाके में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है, जिसके चलते पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

पासी समाज का दावा: ‘सनातन परंपरा के सबूत’

लाखन पासी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी के नेतृत्व में पासी समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि:

  • वास्तुकला: स्थल की दीवारों पर बने फूल, नाग और कलश की आकृतियां सनातन हिंदू परंपरा का प्रतीक हैं, जो इस्लामी वास्तुकला से भिन्न हैं।

  • ऐतिहासिक संदर्भ: पासी समाज का कहना है कि यह स्थल कभी महान राजा कंसा पासी का किला और शिव मंदिर हुआ करता था, जिसे बाद में गलत तरीके से मकबरे का स्वरूप दे दिया गया।

  • पुरातात्विक मांग: पासी समाज ने प्रशासन से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सर्वे कराने और पुराने राजस्व अभिलेखों (Revenue Records) की जांच करने की मांग की है।

मुस्लिम पक्ष का पलटवार: ‘रिकॉर्ड में है मस्जिद’

वहीं, इस दावे को मुस्लिम पक्ष ने सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि:

  • सरकारी दस्तावेज: राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों में यह स्थल स्पष्ट रूप से मस्जिद और मकबरे के रूप में दर्ज है।

  • सौहार्द पर चोट: मुस्लिम पक्ष ने इसे धार्मिक स्थलों को विवादित बनाने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनका आरोप है कि ऐसे दावों से क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है। उन्होंने प्रशासन से माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इतिहास के पन्नों में क्या है राजा कंसा का जिक्र?

इस विवाद में ‘लखनऊ गजेटियर’ का भी हवाला दिया जा रहा है। गजेटियर के अनुसार, 11वीं शताब्दी के अंतिम दौर में काकोरी और उसके आसपास के क्षेत्रों में राजा कंसा का शासन और प्रभाव था। इसमें सालार मसूद गाजी और स्थानीय राजाओं के बीच हुए संघर्षों का भी उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक साक्ष्य को आधार बनाकर पासी समाज अपनी दावेदारी को पुख्ता करने में जुटा है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और प्रशासन की चुनौती

विवाद की गंभीरता को देखते हुए मलिहाबाद में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। खुफिया इनपुट के बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच पिछले शुक्रवार को नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने भी अपना विरोध दर्ज कराया। फिलहाल, मामला प्रशासनिक जांच और कानून के दायरे में है। दोनों पक्ष अब आधिकारिक और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

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