‘मुझे धमकियां मिल रही हैं, कर्नाटक जाने से डर लग रहा’: महिला वकील का अदालत में छलका दर्द, दिल्ली में शरण लेने को हुईं मजबूर…

बेंगलुरु/दिल्ली: कर्नाटक के एक हाई-प्रोफाइल मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब पीड़ित महिला की ओर से पैरवी कर रही महिला वकील ने अदालत के सामने अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई। अदालत की कार्यवाही के दौरान वकील ने बेहद भावुक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है, जिसके चलते वह कर्नाटक की सीमा में प्रवेश करने तक का साहस नहीं जुटा पा रही हैं। यह मामला अब केवल कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें एक वकील की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया में आ रहे अवरोधों का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

सुरक्षा के अभाव में दिल्ली में रहने की मजबूरी

अदालत में अपनी दलीलें पेश करते हुए महिला वकील ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता किया जा रहा है। उन्होंने न्यायाधीश के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि धमकियों का सिलसिला इस कदर बढ़ गया है कि वह अपने घर या कार्यक्षेत्र कर्नाटक में कदम नहीं रख पा रही हैं। वर्तमान में वह सुरक्षा कारणों से दिल्ली में रहने को मजबूर हैं। वकील का कहना है कि एक तरफ वह न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं और दूसरी तरफ उन्हें निजी तौर पर निशाना बनाया जा रहा है, जिससे उनके पेशेवर दायित्वों के निर्वहन में बाधा आ रही है।

बार-बार मिल रही धमकियों से न्याय प्रक्रिया पर संकट

वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि धमकियां केवल एक बार नहीं, बल्कि बार-बार दी जा रही हैं। अज्ञात तत्वों द्वारा उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि वह इस मामले से पीछे हट जाएं। अदालत में दिए गए इस बयान के बाद कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया है। वकील ने जोर देकर कहा कि जब तक उन्हें ठोस सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जाती, तब तक उनके लिए कर्नाटक आकर पैरवी करना नामुमकिन है। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर गौर करने के संकेत दिए हैं।

न्याय की गुहार और प्रशासन की भूमिका

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर वकीलों की सुरक्षा और गवाहों के संरक्षण के मुद्दे को गरमा दिया है। महिला वकील ने अदालत से अपील की है कि उन्हें निर्भय होकर काम करने का वातावरण दिया जाए। दिल्ली में रहकर वह अपनी सुरक्षा तो सुनिश्चित कर पा रही हैं, लेकिन मामले की सुनवाई में प्रत्यक्ष उपस्थिति न हो पाने के कारण न्याय में देरी की आशंका बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि अदालत और संबंधित राज्य सरकार इस महिला वकील को कर्नाटक में सुरक्षित प्रवेश दिलाने के लिए क्या कदम उठाती है।

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