
बॉलीवुड के तीन सबसे बड़े सुपरस्टार्स—शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ—इन दिनों अपनी फिल्मों को लेकर नहीं, बल्कि एक बहुचर्चित विज्ञापन को लेकर गंभीर कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) ने इन तीनों दिग्गज अभिनेताओं को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन के जरिए कथित तौर पर पान मसाला और गुटखा का सरोगेट (परोक्ष) प्रचार करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इन अभिनेताओं ने नोटिस का जवाब देने में किसी भी तरह की टालमटोल की या उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया, तो उन पर पहले चरण में ही 10 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। यह हाई-प्रोफाइल मामला ब्रांड एंडोर्समेंट, भ्रामक विज्ञापनों और खाद्य सुरक्षा नियमों के बीच छिड़ी एक नई और तीखी बहस का केंद्र बन गया है, जिसने पूरी विज्ञापन और मनोरंजन इंडस्ट्री की नींद उड़ा दी है।
‘देर आए दुरुस्त आए’: एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे का कड़ा रुख
महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इस मामले पर मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि कानून सभी के लिए बराबर है और किसी भी सेलिब्रिटी को उसके स्टारडम के चलते बख्शा नहीं जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि अभिनेताओं पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों हुई, तो मुंढे ने साफ कहा कि विभाग इस पूरे मामले की गहराई से जांच और निगरानी कर रहा था। उन्होंने कहा, “आप कह सकते हैं कि यह कार्रवाई थोड़ी देर से हुई है, लेकिन देर से आना न आने से बेहतर है।” मुंढे के अनुसार, यदि तीनों सितारों का जवाब एफडीए को संतुष्ट नहीं कर पाता है, तो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) एक्ट के तहत शुरुआती स्तर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना ठोका जाएगा। बात यहीं खत्म नहीं होगी; यदि इसके बावजूद जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं हुआ, तो प्रतिबंधित उत्पादों के विज्ञापन से जुड़े सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
सरोगेट विज्ञापन का मायाजाल: इलायची के बहाने पान मसाला का प्रचार?
यह पूरा विवाद ‘सरोगेट एडवरटाइजिंग’ (Surrogate Advertising) के इर्द-गिर्द घूमता है। सरोगेट विज्ञापन वह चालाकी भरा तरीका है जिसमें किसी प्रतिबंधित या हानिकारक उत्पाद (जैसे शराब, सिगरेट, या गुटखा) का प्रचार सीधे तौर पर न करके, उसी ब्रांड नाम के तहत किसी अन्य हानिरहित उत्पाद (जैसे सोडा, म्यूजिक सीडी, या इलायची) का विज्ञापन किया जाता है। एफडीए का आरोप है कि ‘विमल इलायची’ का विज्ञापन प्रथम दृष्टया इसी श्रेणी में आता है। भले ही शाहरुख, अजय और टाइगर स्क्रीन पर ‘इलायची’ चबाते नजर आ रहे हैं, लेकिन यह ब्रांड मुख्य रूप से पान मसाला और गुटखा उत्पादों के लिए जाना जाता है। एफडीए का मानना है कि इस तरह के विज्ञापनों से दर्शकों के अवचेतन मन में पान मसाला की ही ब्रांडिंग होती है, जो कि महाराष्ट्र में बैन है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन 2018 की धारा 53 के तहत भ्रामक, झूठे या प्रतिबंधित उत्पादों का परोक्ष प्रचार करना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
मन्नत से लेकर जुहू तक पहुंचे नोटिस, 15 दिन का मिला है अल्टीमेटम
एफडीए ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए पूरी कानूनी प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया है। अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एफडीए द्वारा ये कारण बताओ नोटिस 11 और 14 अगस्त के बीच जारी किए गए थे। शाहरुख खान को यह कानूनी नोटिस मुंबई के बांद्रा स्थित उनके आलीशान आवास ‘मन्नत’ (Mannat) पर भेजा गया है। वहीं, ‘सिंघम’ स्टार अजय देवगन को जुहू स्थित उनके घर पर और एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ को उनकी प्रोडक्शन कंपनी ‘टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी’ के आधिकारिक पते पर नोटिस थमाया गया है। विभाग ने इन तीनों अभिनेताओं को अपना पक्ष रखने और इस विज्ञापन में अपनी भूमिका व ब्रांड के साथ अपने अनुबंध को स्पष्ट करने के लिए नोटिस प्राप्ति से 15 दिनों का सख्त अल्टीमेटम दिया है।
सेलिब्रिटीज की जवाबदेही: सिर्फ पैसा लेना काफी नहीं, नियमों का भी रखना होगा ध्यान
इस मामले ने विज्ञापन की दुनिया में काम करने वाले सभी ब्रांड एंबेसडर्स और हस्तियों के लिए एक बहुत बड़ा सबक पेश किया है। एफडीए कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन की चेन में शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह विज्ञापन बनाने वाली एजेंसी हो, प्रसारक हो, या फिर स्क्रीन पर दिखने वाला सेलिब्रिटी—भ्रामक प्रचार के लिए समान रूप से जवाबदेह है। अब वह दौर खत्म हो रहा है जब सेलिब्रिटीज सिर्फ करोड़ों रुपये की फीस लेकर किसी भी उत्पाद का विज्ञापन कर देते थे और कानूनी जिम्मेदारी से बच निकलते थे। नए उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और एफएसएसएआई (FSSAI) की सख्त गाइडलाइंस के अनुसार, किसी भी उत्पाद का एंडोर्समेंट करने से पहले सेलिब्रिटी की यह नैतिक और विधिक जिम्मेदारी है कि वह इस बात की तस्दीक कर ले कि उत्पाद या उसका प्रचार किसी जन-स्वास्थ्य नियम का उल्लंघन तो नहीं कर रहा है।
महाराष्ट्र एफडीए का महा-अभियान: गुटखा से लेकर क्विक कॉमर्स तक कसा शिकंजा
बॉलीवुड सितारों को भेजा गया यह नोटिस महाराष्ट्र एफडीए के उस व्यापक और आक्रामक ‘क्लीन-अप’ अभियान का ही एक हिस्सा है, जो राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में साल 2012 से ही तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है। इस रोक को हर साल आगे बढ़ाया जाता है और मौजूदा प्रतिबंध जुलाई 2026 से फिर लागू किया गया है। पिछले कुछ महीनों में तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए ने राज्य भर में मिलावटी दूध, होटलों की गंदगी, स्कूलों के बाहर बिकने वाले जंक फूड, और ब्लैक मार्केट में बिक रहे गुटखे के खिलाफ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। एफडीए का खौफ इस कदर है कि फूड हाइजीन और स्टोरेज के नियमों की अनदेखी करने पर ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (Zepto) और इंस्टामार्ट (Instamart) जैसी दिग्गज क्विक कॉमर्स कंपनियों के गोदामों के साथ-साथ कई नामी फास्ट-फूड रेस्तरां के लाइसेंस भी हाल ही में निलंबित किए गए हैं।
आगे क्या होगा? पूरी इंडस्ट्री की टिकी हैं निगाहें
इस समय पूरी फिल्म और विज्ञापन इंडस्ट्री की निगाहें शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की लीगल टीम की ओर से आने वाले जवाबों पर टिकी हैं। क्या ये तीनों अभिनेता भारी विवाद को देखते हुए विज्ञापन से अपना कॉन्ट्रैक्ट तोड़ लेंगे, या फिर वे एफडीए के सामने यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि वे केवल ‘इलायची’ का प्रचार कर रहे थे और कानून की नजर में उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है? वजह जो भी हो, लेकिन महाराष्ट्र एफडीए के इस कड़े कदम ने साफ कर दिया है कि जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले भ्रामक विज्ञापनों को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर इन सुपरस्टार्स पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगता है, तो यह रकम उनके लिए भले ही बहुत छोटी हो, लेकिन इससे उनकी ‘पब्लिक इमेज’ (Public Image) और ब्रांड वैल्यू पर पड़ने वाला असर काफी गहरा और शर्मिंदा करने वाला साबित हो सकता है।
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