
तेहरान/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने अब ईरान में शिक्षा ग्रहण कर रहे भारतीय छात्रों की रातों की नींद उड़ा दी है। ईरान के इस्फहान (Isfahan) शहर में फंसे भारतीय छात्रों, विशेषकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं ने एक वीडियो संदेश जारी कर भारत सरकार से सुरक्षित निकासी की भावुक अपील की है। छात्रों का कहना है कि इस्फहान के आसपास सुनाई दे रहे धमाकों और आसमान में गूँजती मिसाइलों ने उन्हें दहशत में डाल दिया है।
इस्फहान यूनिवर्सिटी: 25-30 छात्र अनिश्चितता के साये में
‘इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज’ में पढ़ रही भारतीय छात्रा फातिमा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में बताया कि उनके साथ करीब 25 से 30 भारतीय छात्र वहां मौजूद हैं।
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डर का माहौल: फातिमा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इलाके के आसपास तेज विस्फोटों की आवाजें सुनाई दी हैं।
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सीमित संसाधन: स्थानीय दुकानें बंद हो रही हैं और ऑनलाइन सेवाएं ठप होने से खाने-पीने और जरूरी सामान का संकट खड़ा हो गया है।
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हॉस्टल का दबाव: छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें हॉस्टल से बाहर न निकलने की सलाह दे रहा है और जो छात्र बाहर किराए पर रह रहे हैं, उन्हें भी असुरक्षित महसूस हो रहा है।
पढ़ाई और अस्पताल की ड्यूटी बनी बाधा
छात्रों ने बताया कि वे पहले ही भारत लौटना चाहते थे, लेकिन अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए अस्पताल में अनिवार्य ड्यूटी और परीक्षाओं के कारण वे रुकने पर मजबूर हुए।
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ऑनलाइन विकल्प: विश्वविद्यालय ने प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए अगला सेमेस्टर ऑनलाइन करने का संकेत दिया है, जिससे उन्हें घर लौटने की उम्मीद जगी है।
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सीनियर छात्रों की चिंता: अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए अस्पताल जाना अनिवार्य है, जो युद्ध जैसी स्थिति में उनकी जान को जोखिम में डाल रहा है।
यूपी के कई जिलों में परिजनों की बढ़ी धड़कनें
ईरान में फंसे छात्रों के कारण उत्तर प्रदेश के कई जिलों में परिवारों में कोहराम मचा है:
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रामपुर और आजमगढ़: इन जिलों की छात्राएं और छात्र ईरान में फंसे हुए हैं। परिजनों का कहना है कि इंटरनेट सेवाओं में बाधा के कारण उनसे संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है।
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बरेली और बस्ती: बरेली के लगभग 3,000 लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं, जिनके परिजन वतन वापसी के लिए लगातार दुआएं मांग रहे हैं और सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं।
भारत सरकार का रुख: ‘सुरक्षा सर्वोपरि’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक कर खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा की समीक्षा की है। विदेश मंत्रालय (MEA) लगातार तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में है।
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एडवाइजरी: भारत सरकार ने पहले ही भारतीयों को अनावश्यक रूप से ईरान और इजरायल की यात्रा न करने की सलाह दी है।
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निकासी योजना: सूत्रों के अनुसार, यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो सरकार ‘ऑपरेशन कावेरी’ या ‘ऑपरेशन गंगा’ की तर्ज पर ईरान से भारतीयों को निकालने के लिए विशेष विमान भेज सकती है।
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