ईरान को मिला नया ‘सुरक्षा कवच’! अली लारीजानी की मौत के बाद मोहम्मद बागेर जुल्घदर बने नए सिक्योरिटी चीफ

तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और इजरायल के साथ सीधे युद्ध के बीच ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को नया नेतृत्व सौंपा है। देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव अली लारीजानी की एक इजरायली हवाई हमले में हुई शहादत के बाद, मोहम्मद बागेर जुल्घदर (Mohammad Baqer Zolqadr) को ईरान का नया सिक्योरिटी चीफ नियुक्त किया गया है। जुल्घदर के कंधों पर अब ऐसे समय में देश की रक्षा और परमाणु नीति की कमान है, जब ईरान अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है।

इजरायली हमले में लारीजानी का पूरा परिवार हुआ था शिकार

ईरान के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन बेहद दुखद और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुआ है। 17 मार्च को तेहरान के बाहरी इलाके में हुए एक सटीक इजरायली हवाई हमले ने देश को हिलाकर रख दिया था।

  • हमले का विवरण: अली लारीजानी उस समय अपनी बेटी के घर जा रहे थे, जब उनकी कार को निशाना बनाया गया।

  • भारी क्षति: इस हमले में न केवल लारीजानी, बल्कि उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी और उनके कार्यालय प्रमुख अलिरेजा बयात की भी मौत हो गई।

  • लारीजानी का कद: अली लारीजानी ईरान की विदेश और परमाणु नीति के मुख्य वास्तुकार माने जाते थे। उनकी कमी को पूरा करना बागेर जुल्घदर के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

कौन हैं नए सिक्योरिटी चीफ मोहम्मद बागेर जुल्घदर?

मोहम्मद बागेर जुल्घदर ईरान की सैन्य और रणनीतिक व्यवस्था का एक बहुत पुराना और अनुभवी नाम हैं। उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का गहरा जानकार माना जाता है।

  1. अनुभवी रणनीतिकार: जुल्घदर इससे पहले आईआरजीसी (IRGC) और न्यायपालिका में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

  2. कठोर रुख: उन्हें पश्चिम और इजरायल के प्रति बेहद सख्त रुख रखने वाला नेता माना जाता है, जो ईरान की रक्षा तैयारियों को और आक्रामक बना सकते हैं।

  3. बड़ी जिम्मेदारी: सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में, वे अब सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को रिपोर्ट करेंगे और इजरायल के खिलाफ चल रहे युद्ध की अगली रणनीति तय करेंगे।

ईरान की परमाणु और रक्षा नीति पर क्या होगा असर?

लारीजानी की मौत और जुल्घदर की नियुक्ति से यह संकेत मिल रहे हैं कि ईरान अब और भी अधिक सतर्क और रक्षात्मक मुद्रा से हटकर आक्रामक रुख अपना सकता है। वर्तमान में इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अपने 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और तेहरान में सुरक्षा मुख्यालयों पर हुए हमलों के बाद नई नियुक्ति यह दर्शाती है कि ईरान अपनी कमान व्यवस्था (Command Structure) को टूटने नहीं देना चाहता।

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