वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (Mid-East) में धधक रही ईरान-इजरायल जंग के बीच अब भारत की ‘विश्वगुरु’ वाली भूमिका पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और रणनीतिकार डगलस मैकग्रैगर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी सलाह दी है कि इस भीषण युद्ध को रोकने के लिए केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही एकमात्र उम्मीद हैं।
“मोदी ही कर सकते हैं मध्यस्थता”
प्रसिद्ध पत्रकार टकर कार्लसन के पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए डगलस मैकग्रैगर ने कहा कि अमेरिका ने बिना किसी पूर्व सूचना के ईरान पर हमला करके अपनी छवि को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप को तुरंत पीएम मोदी को फोन करना चाहिए। भारत के संबंध इजरायल और ईरान दोनों से बेहद मजबूत हैं। भारत की न तो ईरान से कोई दुश्मनी है और न ही शिया समुदाय से। मोदी की मध्यस्थता ही इस क्षेत्र में शांति ला सकती है।”
होर्मुज की नाकेबंदी और तेल संकट पर अमेरिका को घेरा
मैकग्रैगर ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका आज ‘स्कूल के बुली बच्चे’ की तरह व्यवहार कर रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से भारत, जापान और चीन जैसे देशों में तेल और गैस की किल्लत हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या आपने हमला करने से पहले अपने उन सहयोगी देशों से सलाह ली जो अपनी तेल जरूरतों का 60% यहीं से पूरा करते हैं? नहीं, आपने नहीं ली, और इसीलिए आज पूरी दुनिया परेशान है।”
ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ नामुमकिन: अमेरिकी अधिकारी
पूर्व सैन्य अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शुरुआती हमलों में भले ही अयातुल्ला खामेनेई और उनके परिवार के सदस्य मारे गए हों, लेकिन अब जो नया नेतृत्व (मुजतबा खामेनेई) उभरा है, उसके मन में अमेरिका के लिए केवल नफरत है। ऐसे में वायुसेना और नौसेना के जरिए जंग को ज्यादा लंबा खींचना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
इजरायल का परमाणु रहस्य और ‘ग्राउंड वॉर’ का खतरा
डगलस ने आगाह किया कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरान की धरती पर उतरते हैं, तो यह सबसे बड़ी ऐतिहासिक गलती होगी। उन्होंने इजरायल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नेतन्याहू लगातार अमेरिका को उकसा रहे हैं, लेकिन अगर अमेरिका पीछे हटा तो इजरायल क्या करेगा? उन्होंने इजरायल के अघोषित परमाणु हथियारों की ओर इशारा करते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया।
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