ईरान-इजरायल युद्ध: ‘बिना शर्त सरेंडर करे ईरान, वरना खैर नहीं’, डोनाल्ड ट्रंप की इस चेतावनी से दहल उठा तेहरान

वॉशिंगटन/तेहरान। मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कड़े तेवरों से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हालिया बमबारी के बीच ट्रंप ने सीधा और दो-टूक संदेश जारी किया है। ट्रंप ने कहा है कि अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है और ईरान के पास केवल एक ही रास्ता बचा है— ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’। ट्रंप के इस बयान ने जलते हुए मध्य पूर्व में घी डालने का काम किया है, जिससे ईरान की मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं।

ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति की वापसी

व्हाइट हाउस की सत्ता संभालने की तैयारी कर रहे डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनकी दूसरी पारी में ईरान के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने एक आधिकारिक बयान में संकेत दिया है कि ईरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं और हमास-हिजबुल्लाह जैसे गुटों को समर्थन देना तुरंत बंद करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में ईरान पर लगने वाले कड़े आर्थिक और सैन्य प्रतिबंधों का ब्लूप्रिंट है। यदि ईरान ने घुटने नहीं टेके, तो अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर बड़ी सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा।

इजरायल के हमलों के बाद बैकफुट पर ईरान?

हाल ही में इजरायल के 50 लड़ाकू विमानों ने ईरान के अंदर घुसकर जिस तरह से तबाही मचाई है, उसने ईरानी रक्षा तंत्र की पोल खोल दी है। इसके बाद ट्रंप के इस बयान ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए धर्मसंकट पैदा कर दिया है। एक तरफ घर में जनता का आक्रोश है और दूसरी तरफ दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति का दबाव। ट्रंप की रणनीति अब ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की है, ताकि वह इजरायल के खिलाफ किसी भी बड़े हमले की हिम्मत न जुटा सके।

क्या अब छिड़ेगा सीधा महायुद्ध?

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद रक्षा विशेषज्ञों में खलबली मच गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान वाकई घुटने टेकेगा या फिर इस अपमान का बदला लेने के लिए ‘सुसाइड मिशन’ पर उतरेगा। अगर ईरान ने सरेंडर नहीं किया, तो खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी युद्धपोत और इजरायली वायुसेना मिलकर ईरान के तेल ठिकानों और परमाणु सेंटरों को निशाना बना सकती हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनके प्रशासन में अमेरिका का स्टैंड ‘इजरायल फर्स्ट’ रहेगा, जो ईरान के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।

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