वर्ल्ड डेस्क, वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र से एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका से युद्धविराम (Ceasefire) का अनुरोध किया है। हालांकि, ट्रंप ने शांति की इस पहल पर तुरंत मुहर लगाने के बजाय एक सख्त शर्त रख दी है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि जब तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से मुक्त और सुरक्षित नहीं कर दिया जाता, तब तक युद्ध नहीं थमेगा। ट्रंप का यह बयान ईरान पर बढ़ते दबाव और क्षेत्र में बदलती सैन्य परिस्थितियों की ओर इशारा कर रहा है।
ट्रंप की दोटूक: ‘होर्मुज खुलेगा, तभी बात बनेगी’
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के नए राष्ट्रपति अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में अधिक समझदार और कम कट्टरपंथी प्रतीत होते हैं। उन्होंने बताया कि तेहरान की ओर से संघर्ष रोकने की अपील की गई है। लेकिन ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हम सीजफायर पर विचार तभी करेंगे जब होर्मुज की जलसीमा पूरी तरह मुक्त होगी। तब तक हमारी कार्रवाई जारी रहेगी। हम ईरान को ऐसी स्थिति में पहुंचा देंगे जिसे ‘पाषाण युग’ कहा जा सकता है।” ट्रंप का निशाना ईरान की उस दुखती रग पर है जहां से दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।
‘ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोककर ही दम लेंगे’
ट्रंप ने अपनी रणनीति साफ करते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह ध्वस्त करना है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि अमेरिका जल्द ही इस मोर्चे पर अपनी जीत सुनिश्चित कर लेगा। ट्रंप ने कहा, “ईरान अब कई वर्षों तक परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। वे हमसे समझौता करना चाहते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हमारा देश अब सबसे शक्तिशाली है। चाहे समझौता हो या न हो, हम उन्हें पाषाण युग में भेजकर ही वहां से निकलेंगे।” उन्होंने शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर का हवाला देते हुए कहा कि निवेशकों को भी अमेरिकी सुरक्षा और रणनीति पर पूरा भरोसा है।
नाटो को बताया ‘कागजी शेर’, ब्रिटेन पर भी साधा निशाना
एक ओर जहां ईरान के साथ तनाव चरम पर है, वहीं ट्रंप ने अपने सहयोगियों को भी नहीं बख्शा। बुधवार को एक इंटरव्यू में उन्होंने नाटो (NATO) को ‘कागजी शेर’ करार देते हुए गठबंधन से अमेरिका के बाहर निकलने के संकेत दिए। ट्रंप इस बात से नाराज दिखे कि नाटो देश ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का खुलकर साथ नहीं दे रहे हैं। उन्होंने ब्रिटेन की सैन्य क्षमता पर तंज कसते हुए कहा कि उनके पास तो ढंग की नौसेना तक नहीं है। ट्रंप के इन तीखे तेवरों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।
शासन परिवर्तन और नई डेडलाइन
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान में ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) की प्रक्रिया अनौपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। उन्होंने सर्वोच्च नेता खामेनेई का जिक्र करते हुए कहा कि अब वहां ऐसे लोगों का समूह है जो अधिक व्यावहारिक हैं। इससे पहले ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले के लिए 10 दिनों की नई डेडलाइन भी तय की थी। ओवल ऑफिस में विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई बैठकों के बाद यह स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन अब ईरान को किसी भी कीमत पर ढील देने के मूड में नहीं है।
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