तेहरान/वाशिंगटन। मध्य पूर्व (Middle East) के हालात इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठे नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक तेवर और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत ईरान को ‘पाषाण युग’ में धकेलने की धमकी ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद ईरान ने अपनी सेना को ‘फुल रेडी’ मोड पर रहने का आदेश जारी कर दिया है, जिससे क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है।
ईरान का पलटवार: ‘दुश्मन का एक भी सैनिक जिंदा न बचे’
ईरान के सैन्य कमांडर-इन-चीफ अमीर हतामी ने गुरुवार को सरकारी मीडिया के जरिए कड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने देश के ऑपरेशनल मुख्यालय को निर्देश दिया है कि दुश्मन की हर हरकत पर ‘सटीक और पैनी’ नजर रखी जाए। हतामी ने दोटूक शब्दों में कहा, “अगर दुश्मन जमीनी कार्रवाई की हिमाकत करता है, तो सुनिश्चित करें कि एक भी शत्रु सैनिक जीवित वापस न जा पाए।” ईरान के सरकारी टेलीविजन पर वरिष्ठ कमांडरों की एक हाई-लेवल मीटिंग का वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें युद्ध की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ समाप्ति के करीब
दूसरी ओर, वाशिंगटन से राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में एक अलग ही तस्वीर पेश की। ट्रंप का दावा है कि ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा सैन्य अभियान अपने अंतिम चरण में है और कुछ ही हफ्तों में अमेरिका के सभी रणनीतिक लक्ष्य पूरे हो जाएंगे। ट्रंप ने कहा:
“हमने व्यवस्थित रूप से ईरान की उस क्षमता को नष्ट कर दिया है जिससे वह दुनिया को धमकाता था। उनकी नौसेना, वायु सेना और मिसाइल प्रोग्राम को भारी नुकसान पहुंचा है। अब अगले 2-3 हफ्तों में हम हमले और तेज करेंगे और उन्हें वापस पाषाण युग (Stone Age) में धकेल देंगे।”
क्या वाकई कुछ बड़ा होने वाला है?
खाड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और ट्रंप की ‘डेडलाइन’ ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। ट्रंप जहां इसे युद्ध की समाप्ति बता रहे हैं, वहीं ईरान इसे अपने अस्तित्व पर हमला मानकर आर-पार की लड़ाई की तैयारी कर रहा है।
मौजूदा तनाव के 3 मुख्य बिंदु:
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जमीनी हमले की आशंका: खाड़ी में अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती संख्या संकेत दे रही है कि अमेरिका केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेगा।
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ईरान की जवाबी घेराबंदी: ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है और ‘प्रॉक्सी वॉर’ के जरिए अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति बनाई है।
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वैश्विक संकट: इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और भारत जैसे देशों के लिए दवा और ऊर्जा की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 15 से 20 दिन पूरी दुनिया के लिए बेहद नाजुक हैं। अगर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत नहीं हुई, तो मध्य पूर्व का यह संघर्ष एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
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