मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीदें लगातार धुंधली होती जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि ईरान परमाणु हथियारों पर अपनी जिद नहीं छोड़ता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले का रास्ता अपना सकता है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने शुक्रवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों पर गंभीरता से विचार किया गया है।
व्हाइट हाउस की ‘हाई-लेवल’ बैठक में क्या हुआ?
शुक्रवार सुबह व्हाइट हाउस में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ और चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स समेत तमाम बड़े सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य मुद्दा ईरान के साथ जारी परमाणु समझौते की वार्ता में गतिरोध था।
ट्रंप ने कार्यक्रम के दौरान दो टूक शब्दों में कहा, “ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन वे परमाणु हथियार नहीं रख सकते। हमने उन्हें कड़ा जवाब दिया है और अगर शर्तें नहीं मानी गईं, तो हमारे पास सैन्य हमले के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”
वार्ता के लिए ‘अंतिम प्रयास’ और पाकिस्तान की मध्यस्थता
जहां एक ओर सैन्य विकल्प पर चर्चा हो रही है, वहीं कूटनीतिक स्तर पर शांति के अंतिम प्रयास भी जारी हैं:
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पाकिस्तानी सेना प्रमुख का दौरा: फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान में मौजूद हैं। शनिवार को उनकी मुलाकात ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) के कमांडर जनरल अहमद वाहिदी से होने की उम्मीद है। पाकिस्तान इस संकट में ‘शटल डिप्लोमेसी’ के जरिए शांति का मार्ग खोजने की कोशिश कर रहा है।
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कतर की भूमिका: कतर का एक प्रतिनिधिमंडल भी अंतिम समय में समझौते को सफल बनाने के लिए इन वार्ता प्रयासों का हिस्सा बना हुआ है।
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बातचीत की स्थिति: अमेरिकी अधिकारियों ने स्थिति को बेहद “चुनौतीपूर्ण” बताया है। हालांकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने “मामूली प्रगति” की बात कही है, लेकिन अभी तक कोई भी मसौदा दोनों देशों को मान्य नहीं हो पाया है।
परमाणु हथियार: विवाद की मुख्य जड़
ईरान-अमेरिका के बीच इस तकरार की मुख्य वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट स्टैंड है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति बनने नहीं देगा। दूसरी ओर, ईरान अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर अड़ा हुआ है।
वर्तमान में स्थिति यह है कि वाशिंगटन में सैन्य विकल्प की तैयारी और तेहरान में कूटनीतिक सक्रियता—दोनों एक साथ चल रही हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मिडिल ईस्ट एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है या शांति का कोई नया रास्ता निकलेगा।
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