तेहरान/नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने अपना सबसे घातक हथियार ‘फतह-2’ (Fattah-2) हाइपरसोनिक मिसाइल मैदान में उतार दिया है। यह पहली बार है जब ईरान ने इस अत्याधुनिक मिसाइल का ‘ऑपरेशनल’ इस्तेमाल किया है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद भड़के ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हाई-वैल्यू टारगेट को निशाना बनाने के लिए इस मिसाइल को तैनात किया है। दावा किया जा रहा है कि यह मिसाइल दुनिया के किसी भी आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को पलक झपकते ही चकमा दे सकती है।
मैक 15 की रफ्तार: क्यों अभेद्य है फतह-2?
‘फतह-2’ कोई साधारण बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है। इसे हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) तकनीक से लैस किया गया है। इसकी कुछ ऐसी खूबियां हैं जो इसे इजरायली ‘आयरन डोम’ या अमेरिकी ‘पैट्रियट’ सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती बनाती हैं:
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अकल्पनीय गति: ईरानी अधिकारियों का दावा है कि यह मिसाइल मैक 15 (ध्वनि की गति से 15 गुना तेज) की रफ्तार पकड़ सकती है। इतनी तेज रफ्तार वाली मिसाइल को इंटरसेप्ट करना वर्तमान डिफेंस सिस्टम के लिए लगभग असंभव माना जाता है।
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हवा में रास्ता बदलने की क्षमता: पारंपरिक मिसाइलों के विपरीत, फतह-2 अपनी उड़ान के दौरान अपनी दिशा (Pitch and Yaw) बदल सकती है। यह अनचाही दिशाओं से टारगेट पर हमला करती है, जिससे रडार इसे ट्रैक नहीं कर पाते।
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मारक क्षमता: यह 1,400 किलोमीटर की दूरी तक सटीक निशाना साध सकती है और अपने साथ 200 किलोग्राम का शक्तिशाली वॉरहेड (विस्फोटक) ले जा सकती है।
अमेरिकी ठिकानों पर ‘फतह’ का प्रहार
सैन्य विशेषज्ञों (Military Watch Magazine) के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर हमला करने के लिए फतह-1 और फतह-2 का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। तेहरान ने उन देशों को भी चेतावनी दी है जहां अमेरिकी ठिकाने हैं।
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निशाने पर अमेरिकी बेस: यूएई, बहरीन, कुवैत और कतर में स्थित अमेरिकी एम्बेसी और फ्लीट हेडक्वार्टर को मिसाइलों और ड्रोनों से टारगेट किया गया है।
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एयर डिफेंस पर दबाव: खाड़ी देशों के एयर डिफेंस सिस्टम को एक साथ सैकड़ों प्रोजेक्टाइल को रोकना पड़ रहा है, जिससे सिस्टम के ‘सैचुरेट’ होने का खतरा बढ़ गया है।
आम जनता पर असर और तबाही
भले ही ईरान का लक्ष्य मिलिट्री फैसिलिटी हैं, लेकिन आसमान में मिसाइलों के इंटरसेप्ट होने और मलबे के गिरने से नागरिक इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। यूएई और कतर जैसे देशों में सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को क्षति पहुंची है और कई लोग हताहत हुए हैं।
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