तेहरान/दुबई: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध जैसे-जैसे लंबा खिंच रहा है, ईरान अब दुनिया की ‘एनर्जी सप्लाई लाइन’ को पूरी तरह काटने की तैयारी में है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद करने के बाद, अब खबरें आ रही हैं कि तेहरान का वॉर रूम एक और रणनीतिक रास्ते ‘बाब-अल-मंदेब’ (Bab-el-Mandeb) को भी सील करने पर विचार कर रहा है।
अगर ऐसा होता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस के लिए ऐसा अकाल पड़ सकता है जिसे दशकों तक याद रखा जाएगा।
ईरान की नई रणनीति: बाब-अल-मंदेब पर नजर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और इजराइल ने उसके नए नेतृत्व या सैन्य ठिकानों पर हमले बंद नहीं किए, तो वह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले बाब-अल-मंदेब को बंद कर देगा।
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क्यों अहम है यह रास्ता: यह जलमार्ग स्वेज नहर के माध्यम से हिंद महासागर और भूमध्य सागर को जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट्स’ में से एक है।
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खामियाजा: इस रास्ते के बंद होने का मतलब है कि यूरोप और एशिया के बीच होने वाला ज्यादातर समुद्री व्यापार ठप हो जाएगा।
“एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं होने देंगे”: IRGC की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने युद्ध के ‘लगभग खत्म’ होने की बात कही थी, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
“युद्ध का अंत ईरान तय करेगा। अगर हमले जारी रहे, तो हम इस पूरे इलाके से एक लीटर तेल भी एक्सपोर्ट नहीं होने देंगे।” – IRGC का आधिकारिक बयान
तेल की कीमतों में लगी आग: $120 के करीब पहुंचा कच्चा तेल
युद्ध के दूसरे हफ्ते में प्रवेश करते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने पिछले 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
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ताजा भाव: ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
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सप्लाई संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना वैश्विक आपूर्ति का 20% (करीब 1.5 करोड़ बैरल) तेल गुजरता है। सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे देशों का निर्यात ठप होने से इराक और कतर को अपना उत्पादन घटाना पड़ा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ‘ब्लैकआउट’ का खतरा
ईंधन की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन टूटने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। भारत सहित कई एशियाई देशों में पहले से ही एलपीजी और डीजल की राशनिंग शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने बाब-अल-मंदेब को भी निशाना बनाया, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पूरी तरह ‘कोल्ड स्टोरेज’ में चला जाएगा।
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