नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने आए अराघची का दिल्ली पहुंचना न केवल कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि उनके विमान ने भी पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक से ईरान ने पश्चिमी देशों को युद्ध की ‘मानवीय कीमत’ का एहसास कराने की कोशिश की है।
‘मिनाब 168’: एक विमान जो चीख-चीख कर कह रहा है युद्ध का दर्द
अब्बास अराघची जिस विशेष विमान से दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरे, उसका नाम ‘मिनाब 168’ रखा गया है। यह महज एक नाम नहीं, बल्कि ईरान के मिनाब शहर में हुए उस भयावह मिसाइल हमले की याद है, जिसमें एक स्कूल की 168 बच्चियों सहित करीब 200 बच्चों की जान चली गई थी। ईरान ने इस विमान का नामकरण उन मासूमों की याद में किया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के मानवीय प्रभाव को दिखाया जा सके। दिल्ली की जमीन पर इस विमान का उतरना ईरान की ओर से दुनिया को दिया गया एक मूक लेकिन कड़ा संदेश माना जा रहा है।
एजेंडे पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और फँसे हुए भारतीय जहाज
ईरानी विदेश मंत्री की भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत में ‘पश्चिम एशिया संकट’ सबसे ऊपर है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा है। युद्ध के कारण इस अहम जलमार्ग पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कई मालवाहक जहाज फंस गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने अराघची के सामने भारतीय जहाजों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षित निकासी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है।
जयशंकर की अपील: अनिश्चितता के दौर में खोजना होगा ‘व्यावहारिक रास्ता’
ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में एस. जयशंकर ने दुनिया के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता ने वैश्विक परिदृश्य को बदल दिया है।” जयशंकर ने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे विकासशील देशों की उम्मीदों पर खरा उतरें और मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस और व्यावहारिक समाधान तलाशें।
ब्रिक्स की अध्यक्षता और भारत की भूमिका
भारत इस साल ब्रिक्स समिट की अध्यक्षता कर रहा है, जो रूस, ब्राजील, ईरान और अन्य सदस्य देशों के लिए एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। अराघची और अन्य देशों के विदेश मंत्री गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। कच्चा तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों और ऊर्जा संकट के बीच भारत की मध्यस्थता और ब्रिक्स की यह बैठक वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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