लंदन/नई दिल्ली : मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आंशिक रूप से बंद किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर हाहाकार मचा है। इस बीच, ब्रिटेन ने अपने सहयोगियों—अमेरिका और इजरायल—की युद्ध रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्रिटेन की नाराजगी: “अमेरिका-इजरायल के पास कोई निकास योजना नहीं”
ब्रिटेन की वित्त मंत्री राहेल रीव्स ने अमेरिका और इजरायल की कार्यप्रणाली पर गहरी निराशा व्यक्त की है। स्पेन के अर्थव्यवस्था मंत्री के साथ एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा:
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स्पष्टता का अभाव: ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध को लेकर अमेरिका और इजरायल के पास कोई ठोस ‘एक्जिट प्लान’ (निकास योजना) या स्पष्ट उद्देश्य नहीं हैं।
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पूर्वानुमान के बावजूद तैयारी नहीं: होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका पहले से थी, लेकिन अब जब संकट सामने है, तो सहयोगी देशों के पास कोई प्रभावी रोडमैप नजर नहीं आ रहा।
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ब्रिटिश अर्थव्यवस्था पर असर: रीव्स ने चेतावनी दी कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का बोझ ब्रिटिश परिवारों पर पड़ेगा। सरकार केवल उन्हीं लोगों की मदद करेगी जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और यह सहायता ‘आय’ के आधार पर तय की जाएगी।
ईरानी राजदूत की चेतावनी: “युद्ध कब और कहां होगा, यह हम तय करेंगे”
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताअली ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए ईरान का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा:
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वार्ता के लिए शर्त: ईरान शांति वार्ता के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिका अपनी ‘गैरकानूनी मांगों’ को छोड़े और तेहरान की शर्तों को स्वीकार करे।
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युद्ध की तैयारी: राजदूत ने कहा कि अमेरिका 3-4 दिनों में युद्ध खत्म करना चाहता था, लेकिन 42 दिनों के बाद भी स्थिति ईरान के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा, “युद्ध की अवधि, दायरा और भौगोलिक स्थिति हमारे नियंत्रण में है।”
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होर्मुज पर नया नियम: फताअली ने होर्मुज स्ट्रेट को ईरान और ओमान का क्षेत्रीय जलक्षेत्र बताते हुए कहा कि ईरान जल्द ही इस जलमार्ग के उपयोग के लिए एक नया तंत्र (Mechanism) घोषित करेगा, जिससे पश्चिमी देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इस्लामाबाद वार्ता रही बेनतीजा
रविवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे लंबी बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है, जिससे ईरान भड़का हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम और होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले व्यापार पर टिकी हैं।
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