यरूशलम/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच मध्यस्थता को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है। एक तरफ पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की कोशिशों में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल ने पाकिस्तान की साख पर कड़ा प्रहार किया है। इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लूर हसन-नहूम ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान खुद जिहादी आतंकवाद की दुनिया में एक बड़ी समस्या है, ऐसे में वह शांति दूत कैसे बन सकता है? इजरायल का मानना है कि भारत की वैश्विक साख और सभी पक्षों के साथ उसके मजबूत संबंध उसे पाकिस्तान की तुलना में कहीं बेहतर मध्यस्थ बनाते हैं।
‘प्रासंगिक बनने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान’
इजरायली दूत फ्लूर हसन-नहूम ने एक हालिया इंटरव्यू में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर तंज कसते हुए कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि पाकिस्तानियों को क्या लगता है कि वे क्या कर रहे हैं। वे बस खुद को प्रासंगिक (Relevant) बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जो देश खुद आतंकवाद की समस्याओं से घिरा हो, उसकी सफलता पर संदेह है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर लगातार इस युद्ध में खुद को एक ‘शांति दूत’ के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इजरायल ने उनके इन दावों की हवा निकाल दी है।
इजरायल की नजर में भारत क्यों है सबसे योग्य?
भारत की तारीफ करते हुए इजरायली दूत ने कहा कि भारत इजरायल का एक बेहद करीबी और विश्वसनीय सहयोगी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के संबंध वैश्विक स्तर पर सभी प्रमुख देशों के साथ बेहतरीन हैं। इजरायल का तर्क है कि भारत की तटस्थता और कूटनीतिक गहराई उसे किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तान से कहीं अधिक सक्षम बनाती है। इजरायल के इस बयान ने दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत के बढ़ते कद को एक बार फिर रेखांकित किया है।
ईरान ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव, पाकिस्तान को झटका
पाकिस्तान की कोशिशों को सबसे बड़ा झटका खुद ईरान ने दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत के लिए तैयार नहीं है। बघाई ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए जो संदेश मिल रहे हैं, उनमें अमेरिका की शर्तें ‘अतार्किक’ हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान ने पाकिस्तान में हुई बैठकों को उसकी ‘निजी पहल’ करार देते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि जब उन पर सैन्य हमला हुआ है, तो उनकी प्राथमिकता केवल अपनी रक्षा करना है, न कि किसी दिखावटी बातचीत का हिस्सा बनना।
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