नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में वैसे तो कानून की गंभीर बहसें होती हैं, लेकिन हाल ही में कोर्ट रूम नंबर 2 में एक ऐसा नजारा दिखा जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं था। मामला एक जनहित याचिका (PIL) का था, जिसे एक 12वीं पास छोटे व्यापारी ने दायर किया था। लेकिन याचिका की हाई-प्रोफाइल अंग्रेजी और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के तड़के ने उसे भारी मुसीबत में डाल दिया।
चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत के सामने जब यह मामला आया, तो उन्होंने न केवल झूठ पकड़ा, बल्कि भरी अदालत में याचिकाकर्ता का ‘इंग्लिश टेस्ट’ लेने की चुनौती भी दे डाली।
CJI का बाउंसर: “30 नंबर ले आओ, तो मान जाऊंगा”
मामले की सुनवाई के दौरान जब सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका के पन्ने पलटे, तो उसमें इस्तेमाल की गई क्लिष्ट कानूनी शब्दावली देखकर उन्हें शक हुआ। उन्होंने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या यह उन्होंने खुद लिखी है? लुधियाना के रहने वाले 12वीं पास शख्स ने बड़े आत्मविश्वास से कहा- “जी हुजूर, मैंने खुद लिखी है। आप चाहें तो मेरा फोन चेक कर लें।”
सीजेआई ने मुस्कुराते हुए एक चुनौती दी, “मैं अभी कोर्ट रूम में तुम्हारा 30 नंबर का अंग्रेजी टेस्ट लेता हूं। अगर तुम पास हो गए, तो मैं याचिका सुन लूंगा।” सीजेआई ने याचिका से एक शब्द उठाया— ‘Fiduciary risk to corporate donors’— और उसका मतलब पूछा। बस यहीं याचिकाकर्ता की बोलती बंद हो गई।
खुलासा: ‘दास सर’, 1000 रुपये और 4 जैकेट
सीजेआई की सख्ती के बाद याचिकाकर्ता ने जो कबूलनामा किया, उसने पूरे कोर्ट रूम को ठहाकों से भर दिया। उसने स्वीकार किया कि याचिका खुद नहीं लिखी, बल्कि इसमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद ली गई है।
लेकिन ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं हुआ! उसने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के ही एक टाइपिस्ट (जिन्हें वह ‘दास सर’ कह रहा था) ने इसे फाइनल टच दिया। इसके बदले में टाइपिस्ट को 1000 रुपये प्रति घंटा की फीस और 4 शानदार जैकेट तोहफे में दी गई थीं। यह सुनकर सीजेआई भी दंग रह गए और बोले— “सुप्रीम कोर्ट के टाइपिस्ट ने यह किया है? बुलाओ उसे यहाँ!”
“वापस जाइए और स्वेटर बेचिए…”
सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका किसी छोटे व्यापारी के दिमाग की उपज नहीं हो सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
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चेतावनी: कोर्ट ने याचिका को ‘बेतुका’ बताते हुए खारिज कर दिया।
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नसीहत: अंत में माहौल हल्का करते हुए सीजेआई ने तंज कसा— “वापस जाइए और अपने काम पर ध्यान दीजिए, कुछ और स्वेटर बेचिए। अगली बार ऐसी जनहित याचिका लाए तो जेल भी हो सकती है।”
AI और फर्जी कानूनों पर पहले भी चेता चुके हैं CJI
यह पहली बार नहीं है जब सीजेआई ने AI के गलत इस्तेमाल पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले भी उन्होंने वकीलों को चेतावनी दी थी कि AI से ड्राफ्ट की गई याचिकाओं में कई बार ऐसे फर्जी केस कानूनों (जैसे ‘Mercy vs Mankind’) का जिक्र होता है, जिनका अस्तित्व ही नहीं है।
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