नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही उत्तर भारत के घरों में लस्सी का दौर शुरू हो जाता है। दही से बनी मीठी और मलाईदार लस्सी न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसे प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह पाचन सुधारने और शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के अनुसार, लस्सी हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है? कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में इसका सेवन फायदे की जगह भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
लस्सी के बेमिसाल फायदे
लस्सी मुख्य रूप से दही और पानी का मिश्रण है, जो शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी है:
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प्रोबायोटिक्स का खजाना: इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पेट को स्वस्थ रखते हैं।
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प्राकृतिक कूलेंट: चिलचिलाती गर्मी में यह शरीर के तापमान को संतुलित रखती है।
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हड्डियों की मजबूती: कैल्शियम से भरपूर होने के कारण यह हड्डियों और दांतों के लिए अच्छी है।
सावधान! ये लोग भूलकर भी न पिएं लस्सी
भले ही लस्सी एक हेल्दी ड्रिंक है, लेकिन निम्नलिखित लोगों को इससे दूरी बनानी चाहिए:
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1. लैक्टोज इनटॉलरेंस (Lactose Intolerance): जिन लोगों को डेयरी उत्पादों से एलर्जी है या जिनका शरीर दूध-दही को पचा नहीं पाता, उन्हें लस्सी पीने से पेट में मरोड़, गैस और डायरिया (दस्त) की शिकायत हो सकती है।
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2. बार-बार सर्दी-जुकाम होने पर: लस्सी की तासीर ठंडी होती है। यदि आपको साइनस, बार-बार खांसी, जुकाम या गले में संक्रमण रहता है, तो लस्सी आपके शरीर में बलगम (Mucus) बढ़ा सकती है, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।
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3. लो ब्लड प्रेशर (Low BP) के मरीज: लस्सी शरीर को शीतलता प्रदान करती है, जिससे ब्लड प्रेशर में मामूली गिरावट आ सकती है। लो बीपी वाले लोगों को इसका सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए।
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4. कमजोर पाचन शक्ति: आयुर्वेद के अनुसार, जिन लोगों की ‘जठराग्नि’ कमजोर है, उन्हें लस्सी पीने से पेट में भारीपन और ब्लोटिंग महसूस हो सकती है।
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5. रात के समय सेवन: रात में लस्सी पीना स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक माना जाता है। इससे न केवल पाचन धीमा होता है, बल्कि सुबह गले में खराश और जकड़न की समस्या भी हो सकती है।
कैसे और कब पिएं? एक्सपर्ट की सलाह
लस्सी का पूरा लाभ उठाने के लिए इन नियमों का पालन करें:
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सही समय: लस्सी पीने का सबसे उत्तम समय दोपहर (Lunch के साथ या बाद) है। इस समय पाचन तंत्र सबसे ज्यादा सक्रिय होता है।
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चीनी की मात्रा: वजन घटाने वालों और डायबिटीज के मरीजों को चीनी वाली लस्सी के बजाय नमकीन छाछ या मसाला लस्सी चुननी चाहिए।
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ताजगी का ध्यान: हमेशा ताजी और घर की बनी लस्सी पिएं। बाजार में मिलने वाली डिब्बाबंद लस्सी में प्रिजर्वेटिव्स और अत्यधिक शुगर होती है।
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तापमान: बहुत ज्यादा बर्फ वाली या एकदम फ्रिज से निकली ठंडी लस्सी पीने से बचें। सामान्य ठंडी लस्सी सेहत के लिए बेहतर है।
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