नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में गुरुवार को उस वक्त दिलचस्प नजारा देखने को मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच एक हल्का-फुल्का लेकिन गहरा राजनीतिक संवाद हुआ। महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने न केवल अखिलेश यादव को अपना मित्र बताया, बल्कि अपनी ‘अति पिछड़ी’ पहचान पर सपा सांसदों द्वारा की गई टिप्पणी का भी सधे हुए अंदाज में जवाब दिया।
कैसे शुरू हुआ ‘मित्रता’ और ‘मदद’ का प्रसंग?
प्रधानमंत्री मोदी जब महिला आरक्षण विधेयक की आवश्यकता पर बोल रहे थे, तब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह विषय लंबे समय से चल रहा है और अब समय आ गया है कि देश की बहनों पर भरोसा किया जाए।
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धर्मेंद्र यादव का हस्तक्षेप: पीएम के भाषण के बीच सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कुछ टिप्पणी की, जिससे पीएम को रुकना पड़ा। धर्मेंद्र यादव संभवतः पीएम की जाति या पिछड़े वर्ग से जुड़ा कोई संदर्भ दे रहे थे।
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PM का जवाब: पीएम मोदी ने तंज और शालीनता के मिश्रण के साथ कहा, “धर्मेंद्र जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मेरी मदद कर देते हैं।”
अखिलेश यादव का रिएक्शन
पीएम मोदी की इस टिप्पणी पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा। विपक्षी बेंच पर बैठे अखिलेश यादव भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और उन्होंने मुस्कुराते हुए प्रधानमंत्री की ओर दोनों हाथ जोड़ लिए। यह पल सदन में बढ़ते तनाव के बीच एक सुखद कूटनीतिक विराम जैसा था।
“संविधान ही सर्वोपरि”: पहचान और दायित्व पर PM की दोटूक
प्रधानमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए स्पष्ट किया कि भले ही उनकी जड़ें एक छोटे और अति पिछड़े समाज में हों, लेकिन उनका विजन व्यापक है:
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सबका साथ: “मेरा दायित्व समाज के सभी लोगों को साथ लेकर चलने का है।”
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संविधान की ताकत: “यह संविधान की ही ताकत है कि मेरे जैसे अत्यंत छोटे समाज के व्यक्ति को देश ने यह बड़ा दायित्व दिया। मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है।”
विपक्ष को ‘मित्रवत’ सलाह: “विरोध की कीमत भारी पड़ेगी”
पीएम मोदी ने उन दलों को चेतावनी दी जो महिला आरक्षण को ‘राजनीतिक रंग’ देने की कोशिश कर रहे हैं:
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इतिहास से सीखें: पीएम ने कहा कि पिछले 30 सालों में जिसने भी महिला आरक्षण का विरोध किया, महिलाओं ने चुनावों में उनका हाल “बुरे से बुरा” किया है।
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2024 का उदाहरण: उन्होंने बताया कि 2024 के चुनाव में किसी का नुकसान नहीं हुआ क्योंकि तब सबने सहमति दी थी।
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राजनीति की बू: पीएम ने सलाह दी कि इसे राजनीतिक चश्मे से न देखें, बल्कि इसे लोकतंत्र की मजबूती के तौर पर लें। उन्होंने कहा कि 50% आबादी को नीति निर्धारण का हिस्सा बनाना अब समय की मांग है।
सदन की अन्य मुख्य बातें
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देरी पर अफसोस: पीएम ने दोहराया कि यह कानून 25-30 साल पहले ही लागू हो जाना चाहिए था।
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नारी शक्ति: उन्होंने ग्रासरूट लेवल (पंचायत और निकाय) पर खड़ी हो चुकी महिला लीडरशिप को मुख्यधारा की राजनीति (संसद/विधानसभा) में लाने की वकालत की।
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