एलडीए का ‘अजूबा’ मास्टर प्लान! कहीं गोमती नदी में उतार दी 24 मीटर चौड़ी सड़क, तो कहीं घनी आबादी के बीच खींच दी काल्पनिक महा-रोड

लखनऊ: लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना दिखाने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के मास्टर प्लान 2016 की ऐसी चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है, जिसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। तत्कालीन अधिकारियों ने दफ्तर की एयरकंडीशनर हवा में बैठकर कागजों पर जो नक्शे खींचे, वे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। कहीं 24 मीटर चौड़ी सड़क सीधे गोमती नदी की लहरों में समा रही है, तो कहीं पहले से बसी घनी बस्तियों के ऊपर से 150 मीटर चौड़ी ‘हवाई’ सड़कें गुजार दी गई हैं। अब शासन के निर्देश पर बनी उच्च स्तरीय समिति इन ‘अजूबों’ की समीक्षा कर रही है।

कालिदास मार्ग: नदी में जाकर ‘गायब’ हो गई सड़क

मास्टर प्लान की सबसे बड़ी लापरवाही मुख्यमंत्री आवास (कालिदास मार्ग) के ठीक सामने देखने को मिली है। यहां कागजों पर 24 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित की गई, जो सीधे गोमती नदी के बीचों-बीच जाकर खत्म हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या तत्कालीन इंजीनियरों ने लोगों को गाड़ियां लेकर सीधे नदी में उतरने का प्लान बनाया था? बिना मौके पर जाए बनाए गए इस प्लान ने प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आईआईएम रोड: 60 मीटर की जगह 150 मीटर का ‘हवाई’ दावा

आईआईएम रोड पर जमीनी हकीकत यह है कि वहां 60 मीटर चौड़ी सड़क पहले से बनी हुई है और दोनों तरफ घनी आबादी बस चुकी है। लेकिन मास्टर प्लान में इसे 150 मीटर चौड़ा दिखा दिया गया। अब इतनी चौड़ी सड़क बनाने का मतलब है हजारों लोगों के घरों को उजाड़ना, जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है। यही हाल सीतापुर रोड से सृष्टि अपार्टमेंट के पीछे का है, जहां आबादी के बीच 150 मीटर चौड़ी सड़क का काल्पनिक जाल बिछा दिया गया है।

कानपुर-मोहान रोड और अयोध्या मार्ग: कागजों और सच्चाई में भारी अंतर

  • अयोध्या रोड: मास्टर प्लान में इसे 100 मीटर चौड़ा दिखाया गया है, जबकि मौके पर इसकी चौड़ाई काफी कम है। अब बसी-बसाई दुकानों और मकानों के बीच इसे चौड़ा करना एलडीए के लिए गले की फांस बन गया है।

  • कानपुर-मोहान रोड: यहां एनएचएआई ने अपने मानकों पर सड़क बनाई, लेकिन एलडीए ने उसके बगल में 150 मीटर की समानांतर ‘इनर रोड’ प्रस्तावित कर दी। नतीजा यह है कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के नक्शे पास नहीं हो रहे और विकास पूरी तरह ठप पड़ा है।

दफ्तरों में बैठकर बना दिया ‘काल्पनिक लखनऊ’

समीक्षा समिति की बैठकों में यह साफ हो रहा है कि 2016 के मास्टर प्लान को तैयार करने वाले अधिकारियों ने कभी फील्ड विजिट की जहमत ही नहीं उठाई। उन्होंने गूगल मैप या पुराने नक्शों पर मनमाने तरीके से लकीरें खींच दीं। इस अदूरदर्शिता का खामियाजा आज लखनऊ की जनता और वर्तमान प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है। नक्शे और हकीकत के इस टकराव के कारण शहर का सुनियोजित विकास विवादों में घिरा हुआ है।

सुधार की कवायद: उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने संभाली कमान

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता वाली प्रदेश स्तरीय समिति अब इन खामियों को दुरुस्त करने में जुट गई है। समिति में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक और आवास बंधु के निदेशक जैसे बड़े अधिकारी शामिल हैं। समिति का मुख्य उद्देश्य अब मास्टर प्लान को जमीनी हकीकत के साथ ‘सिंक’ करना है ताकि लोगों की परेशानियां दूर हों और शहर का विकास पटरी पर लौट सके।

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