Lucknow Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के टेढ़ी पुलिया इलाके में बुधवार को लगी भीषण आग ने न केवल सैकड़ों घरों को राख कर दिया, बल्कि कई परिवारों के भविष्य के सपनों को भी झुलसा दिया है। गुरुवार सुबह जब प्रभावित लोग अपनी झोपड़ियों के मलबे के पास पहुंचे, तो वहां केवल मातम और सन्नाटा था। कल तक जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां आज केवल जले हुए लोहे के बक्से, अधजले बर्तन और राख का ढेर बचा है।
बस्ते में बची सिर्फ राख: बच्चों की पढ़ाई पर संकट के बादल
अग्निकांड की सबसे मार्मिक तस्वीर तब दिखी जब 10 साल की नैंसी और 14 साल का आलोक राख के ढेर में अपनी किताबें और कॉपियां तलाशते नजर आए। नैंसी के हाथ में किताबों के कुछ अधजले पन्ने थे, जिन्हें देख वह फूट-फूट कर रोने लगी। उसके पिता ने कड़ी मेहनत से 12 हजार रुपये की किताबें और यूनिफॉर्म खरीदी थी, जो एक ही पल में स्वाहा हो गई। बस्ती के अधिकतर बच्चे निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे, जिनका पूरा शैक्षणिक साल अब खतरे में है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष मदद की गुहार लगाई है।
शादी की खुशियां मातम में बदली: सिर्फ 10 बाराती ही पहुंच सके
बस्ती में रहने वाले मनीष के घर में बुधवार को शहनाई बजनी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस वक्त आग ने तांडव मचाया, उस वक्त शादी की तैयारियां चल रही थीं। मनीष के भाई लकी ने बताया कि लड़की पक्ष ने 150 बारातियों के लिए इंतजाम किया था, लेकिन बस्ती में मचे हाहाकार की वजह से केवल 10 लोग ही बारात में शामिल हो सके। दुल्हन की विदाई के बाद उसे चाचा के घर ले जाना पड़ा, क्योंकि मनीष का अपना घर और पूरी गृहस्थी राख बन चुकी थी।
पाई-पाई जोड़कर जमा किए थे पैसे, अब खाली हाथ
हादसे वाली जगह पर नजमा नाम की महिला अपने हाथों में जले हुए नोट लेकर सुबकती नजर आई। नजमा ने कमेटी के जरिए बड़ी मुश्किल से डेढ़ लाख रुपये जोड़े थे ताकि पति के ई-रिक्शा का काम ठीक कराया जा सके। वहीं, मेराज नाम के शख्स की आंखों के सामने उसकी बेटी की शादी के लिए जमा किए गए 3 लाख रुपये जलकर खाक हो गए। मेराज ने बताया कि बक्से में रखी पूरी नकदी अब कागज का काला टुकड़ा बन चुकी है।
लखनऊ अग्निकांड: अब तक 5 की मौत, दहशत का माहौल
बता दें कि इस भयावह अग्निकांड में अब तक 5 लोगों की जान जा चुकी है। बुधवार को एक के बाद एक 100 से ज्यादा गैस सिलेंडरों के धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया था। धुएं का गुबार 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया। शासन ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है, लेकिन बेघर हुए सैकड़ों परिवारों के लिए दोबारा जिंदगी पटरी पर लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
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