
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के विकास को नई रफ्तार देने के लिए विधानसभा में अपना अनुपूरक बजट पेश कर दिया है। इस बजट में न केवल बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस किया गया है, बल्कि तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण विकास और औद्योगिक निवेश के लिए भी सरकार ने अपना खजाना खोल दिया है। Google Discover और आधुनिक AI सर्च इंजन के मानकों को ध्यान में रखते हुए, हम आपके लिए इस अनुपूरक बजट का विस्तृत, सटीक और सबसे आसान विश्लेषण लेकर आए हैं। आइए जानते हैं कि इस बजट में आपके शहर, आपके गांव और उत्तर प्रदेश के भविष्य के लिए क्या-क्या खास प्रावधान किए गए हैं।
हरदोई के लिए ऐतिहासिक सौगात: राजा टोडरमल संस्थान बनेगा अत्याधुनिक विश्वविद्यालय
इस अनुपूरक बजट की सबसे बड़ी और अहम घोषणाओं में से एक हरदोई जिले के लिए है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हरदोई स्थित ‘राजा टोडरमल सर्वेक्षण और भूलेख प्रशिक्षण संस्थान’ को एक पूर्ण विकसित विश्वविद्यालय (University) के रूप में अपग्रेड करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके लिए बजट में 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का प्रस्ताव रखा गया है।
आपको बता दें कि यह संस्थान उत्तर प्रदेश के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां लंबे समय से भूलेख, भूमि सर्वेक्षण और राजस्व से जुड़े जटिल कार्यों की ट्रेनिंग दी जाती रही है। विश्वविद्यालय बन जाने के बाद इस संस्थान में शिक्षा और शोध का दायरा कई गुना बढ़ जाएगा। इससे भविष्य में राजस्व और भूलेख से जुड़े प्रशिक्षण को और अधिक व्यापक, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने का रास्ता साफ होगा। गौरतलब है कि साल 2017 में ही इस संस्थान में एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया गया था, जब खेतों की सीमा और भूमि की पैमाइश के लिए पुरानी पद्धतियों को छोड़कर सेटेलाइट और कोऑर्डिनेट आधारित आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हुआ था। अब विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से यह संस्थान पूरे भारत में भूमि सर्वेक्षण तकनीक का एक बड़ा हब बनकर उभरेगा।
चकबंदी और राजस्व अधिकारियों के लिए हाई-टेक ट्रेनिंग की व्यवस्था
जमीन से जुड़े विवादों को सुलझाने और किसानों को राहत देने में चकबंदी अधिकारियों की भूमिका सबसे अहम होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अनुपूरक बजट में चकबंदी अधिकारियों के प्राविधिक प्रावधानों के लिए भी खजाना खोला है। इसके तहत लगभग 1.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता प्रस्तावित की गई है। इस फंड का सीधा इस्तेमाल चकबंदी अधिकारियों के उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, विभागीय व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने और जरूरी प्रशासनिक कामों को तेज करने में किया जाएगा। इसका सीधा फायदा प्रदेश के लाखों किसानों को मिलेगा, जिनके जमीन संबंधी कार्य अब और अधिक तेजी और तकनीकी सटीकता के साथ पूरे हो सकेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं को 1500 करोड़ की ‘बूस्टर डोज’: गांव से लेकर शहर तक मजबूत होगा ढांचा
उत्तर प्रदेश सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेशवासियों का स्वास्थ्य उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। अनुपूरक बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को कुल 2000.25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को मिला है, जिसे सरकार ने 1500 करोड़ रुपये की ‘बूस्टर डोज’ दी है। इसके अलावा प्रदेश की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए आयुष विभाग को भी 23.25 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है।
आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुचारू रखने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 108 ईएमटीएस (EMTS) ‘स्वास्थ्य सेवा’ के संचालन के लिए 200 करोड़ रुपये और महिलाओं व नवजातों के लिए चलने वाली 102 एंबुलेंस के संचालन के लिए भी 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि 102 एंबुलेंस के लिए यह राशि केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद के अतिरिक्त राज्य सरकार ने अपने खजाने से दी है।
शहरी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अग्निशमन (Fire Safety) व्यवस्था के लिए 96 करोड़ रुपये का विशेष इंतजाम किया गया है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रदेश में ‘राज्य कैंसर मिशन’ की स्थापना की जा रही है। वहीं, राजधानी लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई (SGPGI) में ‘क्वार्टनरी हेल्थ केयर सेंटर’ की स्थापना, ऑपरेशन थिएटर सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम और पूरे प्रदेश में ‘स्मार्ट आईसीयू नेटवर्क’ विकसित करने जैसी अत्याधुनिक पहल भी इस बजट का मुख्य आकर्षण हैं। दुर्घटनाओं के समय तुरंत इलाज सुनिश्चित करने के लिए ‘एकीकृत ट्रामा एवं इमरजेंसी नेटवर्क’ की स्थापना भी की जा रही है।
अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन: यूपी बनेगा विदेशी निवेश और उद्योगों का ग्लोबल हब
उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बनाने के लिए योगी सरकार ने बजट में भारी-भरकम राशि आवंटित की है। औद्योगिक निवेश को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए ‘अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ के लिए 1,500 करोड़ रुपये का विशाल फंड रखा गया है। इसके साथ ही प्रदेश में विदेशी निवेश (FDI) और दुनिया की दिग्गज ‘फार्च्यून-500’ कंपनियों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत 1,303 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया है। ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ को रफ्तार देने के लिए 495.86 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की बात करें तो यूपीडा (UPEIDA) के नए कार्यालय की स्थापना के लिए भूमि खरीद और निर्माण के लिए 119 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। राज्य में आईटी सेक्टर को बूम देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश आईटी सदन’ की स्थापना हेतु 50.02 करोड़ रुपये और तकनीकी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए ‘स्टेट डेटा सेंटर 2.0’ के लिए 51 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
एक्सप्रेस-वे के किनारे बिछेगा औद्योगिक कॉरिडोर का जाल
अनुपूरक बजट में भौगोलिक (Local) विकास को भी विशेष तरजीह दी गई है। प्रदेश के एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के आस-पास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने के लिए 10 प्रमुख नोड (अमरोहा, फिरोजाबाद, अमेठी, सुल्तानपुर, बदायूं, इटावा, हमीरपुर, महोबा, जालौन और उन्नाव) में आंतरिक अवसंरचना (Internal Infrastructure) के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। इससे इन जिलों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, भविष्य की मेडिकल जरूरतों को देखते हुए ‘उत्तर प्रदेश ऑक्सीजन उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2021’ के लिए 40.92 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी शामिल की गई है।
ग्राम्य विकास: 17 हजार करोड़ से संवरेगा यूपी के गांवों का स्वरूप
भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और यूपी के अनुपूरक बजट में इसे पूरी तरह चरितार्थ किया गया है। ग्राम्य विकास विभाग को इस बजट में सर्वाधिक 17,942.73 करोड़ रुपये देने का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है। ग्रामीण इलाकों में हर गरीब को पक्की छत मुहैय्या कराने के संकल्प के तहत ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के लिए 745.53 करोड़ रुपये का तगड़ा इंतजाम किया गया है।
गांवों की कनेक्टिविटी को शहरों की तर्ज पर स्मार्ट बनाने के लिए भी सरकार ने खजाना खोला है। ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)’ के अंतर्गत मौजूद ग्रामीण सड़कों के उचित रखरखाव (Maintenance) के लिए 80 करोड़ रुपये और नई सड़कों के निर्माण कार्यों के लिए 591.67 करोड़ रुपये का शानदार प्रावधान किया गया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा पहुंचेगा और किसानों की उपज आसानी से मंडियों तक पहुंच सकेगी।
निष्कर्ष के तौर पर देखा जाए तो योगी सरकार का यह अनुपूरक बजट न केवल उत्तर प्रदेश की वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि यह भविष्य के एक आधुनिक, स्वस्थ और औद्योगिक रूप से सशक्त उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव भी रखता है। चाहे वह हरदोई में नया विश्वविद्यालय हो, हेल्थकेयर का स्मार्ट नेटवर्क हो या फिर एक्सप्रेस-वे के किनारे बसने वाले नए औद्योगिक शहर, यह बजट यूपी को विकास की बुलेट ट्रेन पर सवार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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