AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय मंजूर, उच्च सदन में 113 पर पहुंची BJP; केजरीवाल को पंजाब में तगड़ा झटका

नई दिल्ली: देश की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 बागी सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही राज्यसभा में भाजपा की ताकत बढ़कर 113 सदस्यों की हो गई है, जो पार्टी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, ‘आप’ के लिए यह खबर किसी राजनीतिक भूकंप से कम नहीं है, क्योंकि उच्च सदन में पार्टी अब 10 सांसदों से घटकर महज 3 पर सिमट गई है।

राघव चड्ढा की अगुवाई में हुआ बड़ा ‘ऑपरेशन’

पंजाब से आने वाले आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों ने पार्टी के मूल उद्देश्यों से भटकने का आरोप लगाते हुए पाला बदला है। इस पूरे घटनाक्रम में राघव चड्ढा की भूमिका मुख्य रही, जिनकी लीडरशिप में इन सांसदों ने भाजपा का दामन थामा। पाला बदलने वाले सांसदों में पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। अब पंजाब से राज्यसभा में ‘आप’ का प्रतिनिधित्व करने वाले केवल बलबीर सिंह सीचेवाल ही बचे हैं।

संदीप पाठक का जाना केजरीवाल के लिए सबसे बड़ी चोट

इस टूट में सबसे चौंकाने वाला नाम संदीप पाठक का है। पाठक को अरविंद केजरीवाल का ‘चाणक्य’ माना जाता था और वे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव थे। सूत्रों के मुताबिक, पाठक ने हाल ही में केजरीवाल से मुलाकात कर पंजाब के मामलों में अपनी उपेक्षा पर नाराजगी जताई थी, लेकिन कोई समाधान न निकलता देख उन्होंने पार्टी को अलविदा कहना ही बेहतर समझा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाठक का जाना ‘आप’ के संगठनात्मक ढांचे के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।

केजरीवाल पर लगा इस्तीफा मांगने का आरोप

सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने उन्हें बुलाकर खुद इस्तीफा देने को कहा था। साहनी के मुताबिक, “22 अप्रैल को हुई मीटिंग में केजरीवाल ने मुझसे पूछा कि क्या मुझ पर कोई दबाव है? जब मैंने इससे इनकार किया, तो उन्होंने मुझे राज्यसभा पद छोड़ने की सलाह दी।” साहनी ने इस्तीफा देने से मना कर दिया और अंततः भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।

दल-बदल कानून और सभापति का फैसला

आम आदमी पार्टी ने इस विलय को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। ‘आप’ ने राज्यसभा सभापति के पास अर्जी दाखिल कर तीन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी, दलील दी गई थी कि यह दल-बदल कानून का उल्लंघन है। हालांकि, सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को सभी कानूनी पहलुओं को देखने के बाद इस विलय को हरी झंडी दे दी, जिससे उच्च सदन का पूरा गणित ही बदल गया है।

Check Also

‘झोला उठाने का समय आ गया’: दवा की कीमतों और कैंसर इलाज के खर्च को लेकर केंद्र पर बरसी कांग्रेस; पूछे तीखे सवाल

देशभर में जीवनरक्षक दवाओं की बढ़ती कीमतों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज …