टीएमसी का कांग्रेस में विलय या कुछ और… केसी वेणुगोपाल ने बताया सोनिया गांधी-ममता बनर्जी की मीटिंग का असली मकसद!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे अभूतपूर्व आंतरिक विद्रोह और विधायकों-सांसदों की बगावत के बीच देश के सियासी गलियारों में एक नई अटकल तेज हो गई थी। चर्चाएं थीं कि अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी टीएमसी का कांग्रेस (Congress) में विलय (Merger) कर सकती हैं। इन अटकलों को हवा तब मिली जब दो दिनों के भीतर ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से दो बार मुलाकात की और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से चर्चा की।

सोशल मीडिया और राजनीतिक सूत्रों के हवाले से यहां तक दावे किए जाने लगे कि इस विलय सौदे के तहत ममता बनर्जी को कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव का पद ऑफर किया गया है। हालांकि, अब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इन सभी खबरों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

केसी वेणुगोपाल ने विलय के दावों को बताया ‘बेबुनियाद अफवाह’

कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल (K.C. Venugopal) ने टीएमसी के कांग्रेस में संभावित विलय के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का बयान: “सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्सों में टीएमसी के कांग्रेस में विलय को लेकर जो कुछ भी बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह से अफवाहें और पूरी तरह बेबुनियाद हैं। कल ही हमारे कम्युनिकेशन सेक्रेटरी ने भी इस पर स्थिति स्पष्ट कर दी थी। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने मैडम सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जो मुलाकातें की हैं, वे पूरी तरह से सामान्य और रूटीन (Routine Meetings) राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा थीं।”

तो फिर सोनिया-ममता की हाई-लेवल मीटिंग का असली मकसद क्या था?

केसी वेणुगोपाल ने इन मुलाकातों के पीछे का मुख्य रणनीतिक एजेंडा साफ करते हुए बताया कि इन बैठकों के पीछे कोई विलय की डील नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करना था:

  • ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करना: वेणुगोपाल के अनुसार, यह बैठक विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ अलायंस (INDIA Alliance) को और अधिक प्रभावी तथा मजबूत बनाने की कवायद का एक हिस्सा थी।

  • अलोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ जंग: उन्होंने जोर देकर कहा, “हर कोई चाहता है कि विपक्ष एकजुट रहे ताकि देश में चल रही इस अलोकतांत्रिक सरकार की मनमानियों के खिलाफ लड़ाई को जमीन पर मजबूत किया जा सके। हम सभी सहयोगी दलों के साथ मिलकर इसी तरह आगे बढ़ेंगे। हमारी बातचीत का एकमात्र मुद्दा यही है, इसके अलावा और कुछ नहीं।”

राज्यसभा चुनाव में ‘सीट चोरी’ का लगाया आरोप, चुनाव आयोग पर बरसे

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केसी वेणुगोपाल ने आगामी राज्यसभा चुनावों की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए। उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (Nomination Paper) रद्द किए जाने के मामले को उठाया।

  • दोहरा रवैया अपनाने का आरोप: वेणुगोपाल ने गुस्से में कहा, “बिना किसी ठोस कानूनी आधार के, एक तरफ तो आप मध्य प्रदेश में हमारी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द कर देते हैं। वहीं दूसरी तरफ, आप विपक्षी (सत्ताधारी) उम्मीदवारों के उन कागजातों को आसानी से मंजूरी दे देते हैं जिनमें ढेरों कमियां और तकनीकी गलतियां हैं। यह साफ तौर पर ‘सीट चोरी’ का मामला है।”

  • चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरना: भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति को ‘दयनीय’ बताते हुए उन्होंने एक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता जब इस धांधली की शिकायत लेकर चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे, तो शुरुआत में उन्हें अंदर जाने की अनुमति तक नहीं दी गई। इसके विरोध में कांग्रेस नेताओं को चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठना पड़ा, जिसके बाद केवल दो नेताओं को शिकायत सौंपने के लिए अंदर जाने दिया गया। वेणुगोपाल ने शिकायत के बावजूद 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी चुनाव आयोग द्वारा कोई फैसला न लेने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।

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