
अयोध्या / लखनऊ: अयोध्या स्थित सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के निर्माण और परिसर में नमाज पढ़े जाने को लेकर दिए गए अपने बयानों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व बाहुबली सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने यू-टर्न ले लिया है। अपने पिछले बयान को “आधा-अधूरी बात” करार देते हुए उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ली है।
बृजभूषण ने अब नया दावा करते हुए कहा है कि हनुमानगढ़ी का अस्तित्व पौराणिक काल से है और इसकी रक्षा मुस्लिम आक्रांताओं से हमेशा नगा साधुओं ने की है।
अपने ही बयान से कैसे पलटे बृजभूषण शरण सिंह?
चार दिन पहले दिए बयान और अब की गई सफाई में बृजभूषण शरण सिंह का रुख पूरी तरह बदल गया है:
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हनुमानगढ़ी के निर्माण पर सफाई: पहले उन्होंने दावा किया था कि हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम शासक ने कराया था। अब उन्होंने कहा, “भगवान शिव ने पार्वती जी से संवाद में हनुमानगढ़ी का उल्लेख किया था। इसका निर्माण किसी व्यक्ति विशेष ने नहीं कराया। यह सनातन काल से अस्तित्व में है।”
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गूगल (Google) पर फोड़ा ठीकरा: उन्होंने कहा कि 1887 के आसपास जब अवध के नवाब/शासक शिराजुद्दौला ने हनुमानगढ़ी में शरण ली थी और लाभ मिलने पर 52 बीघा जमीन दी थी, उसे गूगल पर गलत तरीके से “मंदिर का निर्माण” लिख दिया गया।
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नमाज विवाद पर रुख बदला: पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया, “सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी, लेकिन परिसर में पढ़ी गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जो कहा था, वह पूरी तरह सच है। मेरी बात अधूरी रह गई थी, जिससे भ्रम फैला।”
विवाद की शुरुआत: सीएम योगी के बयान से क्या था कनेक्शन?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा था कि अतीत में राम मंदिर पर सवाल उठाने वालों ने ही हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम किया था।
जब मीडिया ने बृजभूषण शरण सिंह से इस पर सवाल पूछा था, तो उन्होंने सीएम योगी के दावे से अलग बयान देते हुए कहा था कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। इस बयान के बाद विपक्षी पार्टी सपा ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया था, जिसके बाद अब बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्टीकरण देकर मामले को शांत करने की कोशिश की है।
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