सांसदों को धूप और बारिश से बचाएगा नया शेड! संसद भवन के मकर द्वार पर पोर्च बनाने की तैयारी

नए संसद भवन (New Parliament House) में सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और वीवीआईपी गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक और मौसम की मार से सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। संसद के सबसे प्रमुख और व्यस्त प्रवेश द्वारों में से एक ‘मकर द्वार’ (Makar Dwar) पर एक विशेष पोर्च (कवर्ड शेड) का निर्माण करने की योजना बनाई गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य संसद सत्र के दौरान माननीय सांसदों और मंत्रियों को भीषण गर्मी, तेज धूप और मूसलाधार बारिश से बचाना है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने इस परियोजना की रूपरेखा तैयार कर ली है और जल्द ही इस पर जमीनी स्तर पर काम शुरू होने की संभावना है।

मकर द्वार पर क्यों पड़ी पोर्च निर्माण की जरूरत?

नए संसद भवन का उद्घाटन होने के बाद से ही मकर द्वार का उपयोग प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, विपक्ष के नेताओं और अन्य सांसदों द्वारा मुख्य प्रवेश और निकास द्वार के रूप में किया जाता रहा है। हालांकि, भवन की वास्तुकला में ओपन-टू-स्काई (खुले) डिजाइन के कारण गाड़ियों से उतरकर मुख्य प्रवेश द्वार तक जाने के दौरान सांसदों को मौसम के प्रकोप का सामना करना पड़ता था।

विशेष रूप से मानसून सत्र के दौरान जब तेज बारिश होती है, तब सांसद अपनी गाड़ियों से उतरकर छाता लगाकर प्रवेश करते हैं, जिससे कई बार उनके कपड़े और दस्तावेज भीग जाते हैं। वहीं, ग्रीष्मकालीन या बजट सत्र के दौरान कड़कड़ाती धूप और लूक के थपेड़ों के बीच परिसर में पैदल चलना असुविधाजनक साबित हो रहा था। कई वरिष्ठ सांसदों और मंत्रियों ने संसद सचिवालय और सीपीडब्ल्यूडी से इस संबंध में शिकायत और सुझाव दिए थे, जिसके बाद इस पोर्च निर्माण की आवश्यकता को महसूस किया गया।

संसद भवन के वास्तुशिल्प और हेरिटेज लुक्स का रखा जाएगा खास ध्यान

संसद भवन का परिसर देश का सबसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील ढांचा है। ऐसे में मकर द्वार पर बनने वाले इस पोर्च के निर्माण के दौरान भवन की मूल वास्तुकला और सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics) से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सीपीडब्ल्यूडी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, इस पोर्च की डिजाइनिंग इस तरह की जा रही है कि यह नए संसद भवन के बलुआ पत्थरों (Sandstone), जालियों और पारंपरिक भारतीय वास्तुकला के साथ पूरी तरह मेल खाए।

शेड या पोर्च को किसी भी आधुनिक या अलग तरह के धातु के ढांचे के बजाय उसी गुणवत्ता और रंग के पत्थरों व बीम्स का उपयोग करके तैयार किया जाएगा, जिससे यह संसद भवन के मुख्य ढांचे का ही एक अभिन्न हिस्सा महसूस हो। इसके अतिरिक्त, रोशनी और वेंटिलेशन का भी इस तरह इंतजाम किया जाएगा कि दिन के समय प्राकृतिक रोशनी बनी रहे और रात में यह सुरक्षा व खूबसूरती दोनों का अहसास कराए।

मानसून और कड़कड़ाती धूप में सांसदों को होती थी परेशानी

संसद के विगत सत्रों के दौरान कई बार ऐसे दृश्य देखने को मिले थे जब मूसलाधार बारिश के दौरान सांसदों के वाहन मकर द्वार के ठीक सामने आकर रुकते थे, लेकिन गाड़ियों के पोर्टिको में रुकने के बावजूद बूंदें अंदर तक आती थीं या गेट तक जाने वाली कुछ मीटर की दूरी में नेता भीग जाते थे। विशेषकर बुजुर्ग सांसदों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे प्रतिनिधियों के लिए बारिश या कड़ाके की धूप में प्रवेश करना काफी कष्टदायक रहता था।

मीडिया के कैमरे और पत्रकार भी मकर द्वार के बाहर ही नेताओं की बाइट्स और प्रतिक्रियाएं लेने के लिए तैनात रहते हैं। बारिश के दिनों में पत्रकारों और सुरक्षाकर्मियों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। नया पोर्च न केवल सांसदों को एक सुरक्षित और सूखा गलियारा (Protected Corridor) प्रदान करेगा, बल्कि मीडिया ब्रीफिंग के लिए भी एक व्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मदद करेगा।

सीपीडब्ल्यूडी और सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त मास्टर प्लान

मकर द्वार पर बनने वाला यह पोर्च केवल एक साधारण शेड नहीं होगा, बल्कि यह सुरक्षा और सौंदर्यशास्त्र का एक बेजोड़ संगम होगा। दिल्ली पुलिस, पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस (PSS) और विशेष सुरक्षा बलों के साथ समन्वय बनाकर सीपीडब्ल्यूडी ने इसका नक्शा और मास्टर प्लान तैयार किया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह ध्यान रखा जा रहा है कि पोर्च के बनने से किसी भी सीसीटीवी कैमरे के व्यू में कोई बाधा न आए और न ही सुरक्षा जांच बिंदुओं पर कोई असर पड़े।

वाहनों की सुचारू आवाजाही (Smooth Drop-off Point) के लिए पोर्च के नीचे पर्याप्त जगह रखी जाएगी ताकि एक समय में दो से तीन वीवीआईपी गाड़ियां बिना किसी बाधा के रुक सकें और सांसद सुरक्षित रूप से उतरकर अंदर प्रवेश कर सकें। इस निर्माण कार्य को संसद सत्रों के बीच मिलने वाले अवकाश के दौरान पूरा करने की योजना है, ताकि चालू सत्र के दौरान सुरक्षा या संसदीय कार्यवाही में कोई विघ्न न उत्पन्न हो।

नए संसद भवन में लगातार हो रहे व्यावहारिक सुधारात्मक बदलाव

नया संसद भवन भारत की आधुनिक और समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत का प्रतीक है। हालांकि, किसी भी विशाल और नए बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल के बाद उसकी व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर सुधारात्मक बदलाव किए जाते हैं। मकर द्वार पर पोर्च का निर्माण भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले भी सांसदों की सुविधा के लिए आंतरिक गलियारों, कैंटीन व्यवस्था और साउंड सिस्टम में कई छोटे-बड़े व्यावहारिक बदलाव किए जा चुके हैं।

संसदीय मामलों के विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में ऐसे बदलाव अनिवार्य होते हैं ताकि देश के सर्वोच्च विधायी निकाय में आने वाले जन प्रतिनिधियों को निर्बाध वातावरण मिल सके। मकर द्वार पर बनने वाला यह पोर्च जल्द ही मूर्त रूप लेगा, जिससे सांसदों और अधिकारियों को मौसम की दुश्वारियों से स्थाई मुक्ति मिल जाएगी।

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