यूरोप में ‘नया वार फ्रंट’: फिनलैंड को रूस की सीधी चेतावनी, ‘परमाणु हथियार रखे तो पाताल तक करेंगे पीछा, खैर नहीं’

मॉस्को/हेलसिंकी। यूक्रेन और मिडिल ईस्ट की जंग के बीच अब यूरोप के ठंडे गलियारों में परमाणु युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। रूस ने अपने पड़ोसी देश फिनलैंड को एक ऐसी चेतावनी दी है जिससे पूरे स्कैंडिनेवियाई क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) ने साफ कर दिया है कि यदि फिनलैंड ने अपनी धरती पर नाटो (NATO) के परमाणु हथियारों को जगह दी, तो वह न केवल रूस के सीधे निशाने पर होगा, बल्कि उसकी सुरक्षा भी पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार, 6 मार्च को दो-टूक कहा, “फिनलैंड अपनी रक्षा नहीं, बल्कि अपनी तबाही का सामान जुटा रहा है।”

फिनलैंड का बड़ा दांव: 1987 के परमाणु कानून को बदलने की तैयारी

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ फिनलैंड की संसद में पेश किया गया वह प्रस्ताव है, जिसमें दशकों पुराने ‘परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1987’ को बदलने की बात कही गई है। नए कानून के तहत फिनलैंड अपनी सीमा के भीतर परमाणु हथियारों के परिवहन, भंडारण और तैनाती पर लगी पाबंदी को हटाना चाहता है। फिनलैंड के रक्षा मंत्री अंटी हक्कानेन का तर्क है कि यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप का सुरक्षा परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और नाटो का सदस्य होने के नाते फिनलैंड को भी परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Deterrence) का हिस्सा बनना होगा।

“वल्नरेबल” होगा फिनलैंड, रूस ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी

रूस ने फिनलैंड के इस कदम को ‘अत्यधिक उकसावे वाला’ करार दिया है। पेसकोव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फिनलैंड ने सालों तक तटस्थ रहकर जो शांति हासिल की थी, उसे वह अब खुद अपने हाथों से खत्म कर रहा है। उन्होंने आगाह किया कि रूसी सीमा के इतना करीब परमाणु हथियारों की मौजूदगी का मतलब है कि फिनलैंड अब ‘वल्नरेबल’ (अत्यधिक संवेदनशील और असुरक्षित) हो जाएगा। रूस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे अपनी पश्चिमी सीमा पर परमाणु मिसाइलों की तैनाती और सैन्य शक्ति बढ़ाकर इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।

ट्रंप और आर्कटिक पर कब्जे की होड़ ने बढ़ाया तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह तल्खी केवल फिनलैंड तक सीमित नहीं है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनके द्वारा ‘ग्रीनलैंड’ पर नियंत्रण और आर्कटिक संसाधनों पर कब्जे की महत्वाकांक्षा ने रूस को रक्षात्मक मुद्रा में डाल दिया है। रूस को डर है कि फिनलैंड के रास्ते नाटो उसके आर्कटिक सैन्य ठिकानों और समुद्री मार्गों पर नजर रख सकता है। यही कारण है कि रूस अब फिनलैंड को एक ‘बफर स्टेट’ के बजाय एक ‘दुश्मन देश’ की तरह देख रहा है, जिससे भविष्य में सीधे सैन्य टकराव की संभावना बढ़ गई है।

क्या वाकई छिड़ेगा तीसरा विश्व युद्ध?

यूरोपीय संघ के कई देश जैसे फ्रांस और जर्मनी, पहले ही अपनी परमाणु क्षमता को नाटो के लिए साझा करने की पेशकश कर चुके हैं। ऐसे में फिनलैंड का यह कदम यूरोप को एक ऐसे परमाणु ‘ट्रिगर’ पर ले आया है जहाँ छोटी सी गलती भी महाविनाश का कारण बन सकती है। फिलहाल, फिनलैंड की संसद में इस कानून पर मतदान अप्रैल के पहले हफ्ते में होना तय है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। क्या फिनलैंड रूस की धमकी के आगे झुकेगा या फिर नाटो की परमाणु छतरी के नीचे अपनी नई पहचान बनाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

 

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