
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर अपने और अपने परिवार के खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार और डीपफेक कंटेंट के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर किया है। जस्टिस अभय आहूजा की पीठ से अनुमति मिलने के बाद दाखिल इस याचिका में गडकरी ने फेसबुक, इंस्टाग्राम (मेटा), एक्स (ट्विटर) और गूगल/यूट्यूब जैसी बड़ी टेक कंपनियों से भ्रामक पोस्ट्स को तुरंत हटाने की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने इस पूरे मामले में 11 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा पेश किया है।
‘E20 पॉलिसी से मेरा कोई संबंध नहीं’, पेट्रोलियम मंत्रालय का दिया हवाला
सोशल मीडिया पर E20 ईंधन नीति को लेकर हो रही चौतरफा घेराबंदी पर प्रतिक्रिया देते हुए नितिन गडकरी ने अदालत में स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) पूरी तरह से ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय’ (MoPNG) के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का इस नीति के वित्तीय प्रबंधन, प्रशासन या क्रियान्वयन से कोई लेना-देना नहीं है। वे कभी पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रभारी मंत्री नहीं रहे, इसलिए E20 नीति के परिणामों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है।
बेटे की कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोपों को बताया फर्जी और मनगढ़ंत
गडकरी ने उन सभी सोशल मीडिया रील्स और मीम्स का कड़ा खंडन किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि E20 पॉलिसी से उनके बेटे निखिल गडकरी की कंपनी ‘CIAN एग्रो इंडस्ट्रीज’ को अनुचित वित्तीय लाभ मिल रहा है। गडकरी ने इन आरोपों को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित और अपनी छवि धूमिल करने की सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि उनके नाम और आवाज का दुरुपयोग कर 26 से अधिक फर्जी एआई वीडियो और लिंक्स इंटरनेट पर प्रसारित किए गए हैं, जो निष्पक्ष आलोचना के बजाय चरित्र हनन की श्रेणी में आते हैं।
क्या है E20 पेट्रोल विवाद और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
दरअसल, केंद्र सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य तय किया है। हालांकि, वाहन चालकों और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की शिकायत है कि 2023 से पहले बने पुराने वाहनों के इंजन E20 फ्यूल के अनुकूल नहीं हैं। इससे गाड़ियों का माइलेज कम होने और इंजन के फ्यूल सिस्टम में जंग लगने की समस्याएं आ रही हैं। इसी नाराजगी के चलते सोशल मीडिया पर गडकरी को निशाना बनाया जा रहा था, जिसके बाद उन्होंने कानूनी कदम उठाने का फैसला किया।
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