अक्सर माना जाता है कि भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में बाहर काम करने वाले लोग ही डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) का सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक चौंकाने वाले खुलासे ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। सच तो यह है कि 9 से 5 की कॉर्पोरेट जॉब करने वाले और पूरा दिन एयर कंडीशनर (AC) की ठंडी हवा में बिताने वाले ऑफिस कर्मचारी ‘साइलेंट डिहाइड्रेशन’ का शिकार हो रहे हैं।
काम के दबाव के बीच दफ्तरों में लगातार मिलने वाली चाय-कॉफी और एसी की खुश्क हवा मिलकर शरीर को अंदर से सुखा रही है, जिससे आगे चलकर किडनी (गुर्दे) खराब होने और पथरी का खतरा कई गुना बढ़ रहा है। हैदराबाद के केयर हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) डॉ. पी. विक्रांत रेड्डी ने इस गंभीर समस्या पर विस्तार से प्रकाश डाला है। आइए जानते हैं कि आखिर ठंडे कमरों में बैठने वाले लोग क्यों बीमार पड़ रहे हैं और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं।
AC कमरों में बैठे लोगों को क्यों नहीं लगती प्यास? जानें इसके पीछे का विज्ञान
डॉ. पी. विक्रांत रेड्डी के अनुसार, एसी वाले कमरों में बैठने से हमारे मस्तिष्क को मिलने वाले शारीरिक संकेत (बॉडी सिग्नल्स) बेहद कमजोर हो जाते हैं।
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प्यास के संकेतों का गायब होना: सामान्य तौर पर जब हमें गर्मी लगती है या पसीना आता है, तो हमारा शरीर तुरंत प्यास का संकेत देता है और हम पानी पी लेते हैं। लेकिन एसी की ठंडी हवा में पसीना नहीं आता, जिससे प्यास लगने का अहसास ही खत्म हो जाता है।
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सांस और त्वचा से पानी का उड़ना: पसीना न आने के बावजूद हमारा शरीर लगातार त्वचा की सतह और सांस लेने की प्रक्रिया के जरिए पानी खोता रहता है, जिसे ‘इनसेंसिबल वॉटर लॉस’ कहते हैं। कर्मचारियों को घंटों पता ही नहीं चलता कि उनका शरीर अंदर से ड्राई (सूखा) हो रहा है।
ऑफिस की चाय और कॉफी: पानी का विकल्प नहीं, बल्कि शरीर के लिए दुश्मन
दफ्तरों में सुस्ती भगाने या थकान दूर करने के लिए दिनभर में कई कप चाय या कॉफी पीना एक आम कॉर्पोरेट कल्चर बन चुका है। लोग सोचते हैं कि वे लिक्विड ले रहे हैं, इसलिए पानी की कमी पूरी हो रही है, लेकिन यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है।
“चाय और कॉफी में कैफीन होता है, जो ‘डियूरेटिक’ (मूत्रवर्धक) का काम करता है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा नहीं करते, बल्कि उसकी जगह ले लेते हैं। कैफीन के कारण शरीर से बार-बार यूरिन के रास्ते पानी बाहर निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है। यही कारण है कि लोग दिन के अंत तक अत्यधिक थका हुआ और सिर में भारीपन महसूस करते हैं।”
– डॉ. पी. विक्रांत रेड्डी (नेफ्रोलॉजिस्ट)
साइलेंट डिहाइड्रेशन के इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
ऑफिस कर्मचारी अक्सर काम के तनाव के कारण इन लक्षणों को सामान्य समझकर टाल देते हैं, जो कि बेहद खतरनाक है:
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हल्का सिरदर्द होना: दोपहर या शाम के समय अचानक सिर में दर्द शुरू होना।
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एकाग्रता में कमी: काम पर फोकस न कर पाना या दिमाग में धुंधलापन (Brain Fog) महसूस होना।
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शाम को भारी थकान: बिना ज्यादा शारीरिक मेहनत किए भी शाम होते-होते पूरी तरह थका हुआ महसूस करना।
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पेशाब का रंग बदलना: यूरिन का रंग गहरा पीला होना, जो पानी की भारी कमी का मुख्य संकेत है।
लापरवाही का अंजाम: बढ़ सकता है किडनी स्टोन और UTI का खतरा
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि लंबे समय तक ऑफिस में पानी न पीने की इस आदत को न सुधारा गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। शरीर में पानी की निरंतर कमी के कारण किडनी में विषाक्त पदार्थ (Toxins) जमा होने लगते हैं। इससे आगे चलकर गुर्दे की पथरी (Kidney Stones) और मूत्र मार्ग में संक्रमण (UTI – Urinary Tract Infection) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो धीरे-धीरे किडनी फंक्शन को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।
बचाव के आसान उपाय: कॉर्पोरेट कर्मचारी आज से ही बदलें ये आदतें
इस गंभीर समस्या से बचने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में कुछ बेहद आसान बदलाव करने होंगे:
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हर घंटे पानी पीने का अलार्म लगाएं: प्यास लगने का इंतजार न करें। अपने फोन में रिमाइन्डर लगाएं या डेस्क पर एक बड़ी पानी की बोतल भरकर रखें और हर एक घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी जरूर पिएं।
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चाय-कॉफी पर लगाएं लगाम: दिनभर में दो कप से ज्यादा चाय या कॉफी का सेवन न करें। इनकी जगह छाछ, नींबू पानी या सादा पानी पिएं।
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सीट से उठकर छोटा ब्रेक लें: लगातार घंटों कंप्यूटर के सामने बैठने के बजाय हर एक-दो घंटे में अपनी सीट से उठें, थोड़ा टहलें और पानी पिएं। इससे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन और हाइड्रेशन दोनों बेहतर होगा।
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