खिड़कियां खोलें, पंखा चलाएं पर AC हटाएं! भीषण गर्मी से बेहाल ब्रिटेन में सरकार ने क्यों लिया यह हैरान करने वाला फैसला?

यूरोप के अधिकांश देश इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में हैं। ब्रिटेन (UK) में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है, जिसके कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। लेकिन इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच, ब्रिटिश सरकार और लंदन प्रशासन के एक बेहद चौंकाने वाले फैसले ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सरकार ने नागरिकों को अपने घरों से एयर कंडीशनर (AC) हटाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, और इसके लिए बकायदा लोगों को आधिकारिक नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।

आइए जानते हैं कि जहां एक तरफ लोग गर्मी से बेहाल हैं, वहीं सरकार आखिर एसी बंद करने और उन्हें हटाने पर क्यों अड़ी हुई है।

AC हटाने के पीछे क्या है सरकार का तर्क?

ब्रिटिश अखबार ‘द टेलीग्राफ’ की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन की स्थानीय काउंसिल और प्रशासन ने यह आदेश पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर जारी किया है।

  • कार्बन उत्सर्जन का हवाला: अधिकारियों का तर्क है कि एयर कंडीशनर (AC) के चलने से बहुत भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। यह उत्सर्जन वैश्विक तापमान (Global Warming) को और तेजी से बढ़ाता है, जिससे गर्मी का यह चक्र और अधिक खतरनाक होता जा रहा है।

  • अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल: प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि एसी का उपयोग केवल और केवल ‘अंतिम विकल्प’ (Last Resort) के रूप में ही किया जाना चाहिए, न कि एक सामान्य आदत के रूप में।

ब्रिटेन में ‘नेट जीरो पॉलिसी’ (Net Zero Policy) लागू

यूके सरकार देश को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ‘नेट जीरो पॉलिसी’ के नियमों को बेहद सख्ती से लागू कर रही है। लंदन के मेयर सादिक खान पर्यावरण को बचाने के अभियानों पर विशेष जोर दे रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत:

  1. पैसिव कूलिंग (Passive Cooling) को प्राथमिकता: नागरिकों से कहा गया है कि वे कृत्रिम ठंडक की बजाय प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं। जैसे— घरों की खिड़कियां और दरवाजे खोलकर रखें, हवा के वेंटिलेशन को सुधारें और सीलिंग फैन (छत के पंखे) का इस्तेमाल करें।

  2. एक्टिव कूलिंग पर प्रतिबंध: घरों में एसी या अन्य एक्टिव कूलिंग सिस्टम चलाने की अनुमति केवल तभी दी जाएगी, जब मकान मालिक यह साबित कर दे कि उसने पैसिव कूलिंग के सभी प्राकृतिक तरीके आजमा लिए हैं और फिर भी घर रहने लायक ठंडा नहीं हो सका है।

गर्मी का कहर: स्कूल बंद, ट्रेनें ठप और 4,000 ऑपरेशन टले

ब्रिटेन में इस समय हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार को ‘रिस्क टू लाइफ’ (Risk to Life) का रेड अलर्ट जारी करना पड़ा है।

  • सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित: अत्यधिक गर्मी के कारण स्कूलों को बंद कर दिया गया है। पटरियों के पिघलने या मुड़ने के खतरे को देखते हुए कई रूटों पर ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह रोक दिया गया है।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप: सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। अस्पतालों में भीषण हीटवेव और नियमों के कारण एसी का इस्तेमाल न होने की वजह से पूरे ब्रिटेन में लगभग 4,000 से अधिक सर्जरी (ऑपरेशंस) को टालना पड़ा है, ताकि मरीजों को संक्रमण या अन्य खतरों से बचाया जा सके।

सरकार का यह पर्यावरण-अनुकूल कदम लॉन्ग-टर्म के लिए भले ही सही माना जा रहा हो, लेकिन वर्तमान में 40 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी का सामना कर रहे ब्रिटिश नागरिकों के लिए यह फैसला बड़ी मुसीबत और बहस का कारण बन गया है।

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