Pakistan Politics: खुद की मध्यस्थता नाकाम, फिर भी चाहिए ‘नोबेल’! पाक PM शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख के लिए विधानसभा में प्रस्ताव

इस्लामाबाद। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता का कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के भीतर एक अजीबोगरीब कूटनीतिक मांग उठने लगी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ देने के लिए मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा (KPK) विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया।

केपीके विधानसभा में उठा नोबेल का मुद्दा

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-N (PML-N) की विधायक फराह खान ने विधानसभा सचिवालय में यह प्रस्ताव जमा किया है। प्रस्ताव में दावा किया गया है कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने अपने “दूरदर्शी नेतृत्व और रणनीतिक सूझबूझ” से क्षेत्रीय तनाव को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीति के कारण एक वैश्विक संकट टल गया और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।

मध्यस्थता ‘फेल’, फिर भी तारीफों के पुल

दिलचस्प बात यह है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पर सस्पेंस बना हुआ है। हकीकत यह है कि इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी। बावजूद इसके, प्रस्ताव में पाकिस्तान को एक “जिम्मेदार, शांति चाहने वाले और सुलह कराने वाले” राष्ट्र के रूप में पेश किया गया है।

क्या पारित होगा यह प्रस्ताव?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खैबर पख्तूनख्वा में इस प्रस्ताव का पारित होना लगभग नामुमकिन है। इसकी मुख्य वजह यह है कि:

  • प्रदेश की विधानसभा में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का बहुमत है।

  • पीटीआई और शहबाज सरकार के बीच पहले से ही तल्खी बनी हुई है, ऐसे में पीटीआई इसका कड़ा विरोध कर सकती है।

पंजाब विधानसभा पहले ही कर चुकी है सिफारिश

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी मांग उठी है। पिछले हफ्ते, 16 अप्रैल को पंजाब प्रांत की विधानसभा में ऐसा ही एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। वहां भी पीएम शहबाज और सेना प्रमुख मुनीर को मध्य पूर्व में संघर्ष-विराम (Ceasefire) के लिए उनकी ‘कथित’ प्रभावी भूमिका के लिए नोबेल पुरस्कार देने की मांग की गई थी।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की इन कोशिशों को लेकर कूटनीतिक जानकारों की राय अलग है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अपने एयरस्पेस बंद करने जैसी गतिविधियों में शामिल है, वहीं दूसरी ओर शांति पुरस्कार की यह मांग विरोधाभासी नजर आती है।

Check Also

‘युद्ध का कोई सैन्य हल नहीं, सिर्फ एक ही रास्ता’: ईरान ने अमेरिका को दिया सीधा संदेश, होर्मुज पर कड़ा रुख

मध्य पूर्व में बढ़ते भीषण तनाव और अमेरिकी दबाव के बीच ईरान ने वाशिंगटन को …