तेहरान/इस्लामाबाद। मध्य पूर्व में जारी खूनी संघर्ष को रोकने के लिए ‘शांतिदूत’ बनने निकले पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की पाकिस्तान की तमाम कोशिशें औंधे मुंह गिर गई हैं। ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली प्रस्तावित बैठक में शामिल होने से दो टूक इनकार कर दिया है। तेहरान के इस कड़े रुख के बाद शहबाज शरीफ सरकार की कूटनीतिक साख पर बट्टा लग गया है और युद्धविराम की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं।
ईरान ने ठुकराईं अमेरिका की शर्तें, ठंडे बस्ते में गई शांति योजना
वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान सहित सभी मध्यस्थ देशों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है। ईरान का कहना है कि अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तें पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ हैं। तेहरान ने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा है कि वह तभी पीछे हटेगा जब अमेरिका युद्ध का हर्जाना दे, मध्य पूर्व के सभी सैन्य ठिकानों को खाली करे और भविष्य में हमला न करने की लिखित गारंटी दे। इन सख्त मांगों के चलते बातचीत अब ‘डेड एंड’ पर पहुंच गई है।
ट्रंप की भयंकर धमकी: ‘ईरान को पाषाण युग में भेज देंगे’
एक तरफ कूटनीति विफल हो रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर और आक्रामक हो गए हैं। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर ईरान को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि युद्धविराम तभी संभव है जब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार के लिए पूरी तरह खोल दिया जाए। ट्रंप ने सख्त लहजे में लिखा, “जब तक रास्ता नहीं खुलता, हम ईरान पर विनाशकारी बमबारी जारी रखेंगे और उन्हें वापस पाषाण युग (Stone Age) में भेज देंगे।” हालांकि ईरान ने ट्रंप के शांति वार्ता वाले दावों को कोरा झूठ करार दिया है।
हवाई जंग हुई तेज, अमेरिकी फाइटर जेट गिराने का दावा
शांति प्रयासों के बीच जमीनी हालात और बिगड़ गए हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में अमेरिका के एक अत्याधुनिक F-15E युद्धक विमान को मार गिराया है। पश्चिमी मीडिया के मुताबिक, एक अमेरिकी पायलट को रेस्क्यू कर लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। इस घटना ने जलती आग में घी डालने का काम किया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए इराक में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की एडवाइजरी जारी की है।
पाकिस्तान की फजीहत के बाद तुर्की और मिस्र ने संभाला मोर्चा
इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद अब कूटनीति के केंद्र बदलने लगे हैं। पाकिस्तान की नाकामयाबी को देखते हुए तुर्की और मिस्र अब नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। अब चर्चा है कि शांति वार्ता की मेजबानी दोहा (कतर) या इस्तांबुल (तुर्की) में की जा सकती है। पाकिस्तान ने 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव देकर खुद को एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान के इनकार ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया है।
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